341वीं किसान पंचायत हुई संपन्न

देश में लोकतंत्र पर संकट गहरा गया है

*केंद्र की किसान विरोधी नीतियों के चलते किसानों की आत्महत्याएं लगातार बढ़ रही हैं*।

*प्याज पैदा करने वाले किसानों को 50 पैसा किलो भी दाम नहीं मिल रहा* 

*खाद के संकट के प्रति सरकार बेपरवाह*

किसान संघर्ष समिति द्वारा आयोजित 341वीं किसान पंचायत राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुनीलम की अध्यक्षता में संपन्न हुई। पंचायत में विभिन्न राज्यों से आए किसान नेताओं ने एमएसपी, गेहूं खरीदी, फसल बीमा, भूमि अधिग्रहण, बिजली, सर्वर समस्या और आवारा पशुओं से फसल नुकसान जैसे मुद्दों पर अपने विचार सांझा किए।
किसान पंचायत को संबोधित करते हुए डॉ सुनीलम ने कहा कि केंद्र की किसान मजदूर विरोधी नीतियों के चलते देश में गरीबों की संख्या लगातार बढ़ रही है। किसानों की आत्महत्या बढ़ी है, समाज का हर वर्ग त्राहिमाम है, लेकिन वोट चोरी, चारों केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग, चुनाव आयोग के पार्टी मय हो जाने के चलते देश में लोकतंत्र पर संकट गहरा गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री
जनता से त्याग की अपील कर रहे हैं लेकिन खुद ख़िजूल खर्ची कर मौज कर रहे हैं।
डॉ सुनीलम ने कहा कि भारत- अमरीका समझौते के विरोध को देखते हुए समझौते को लागू करने की गति को धीमा कर दिया गया था । अब मोदी सरकार देश के किसान, किसानी और गांव को खत्म करने के लिए औपचारिक तौर पर कृषि समझौता लागू करने जा रही है । 
डॉ सुनीलम ने कहा कि समझौता लागू हुआ तो
 किसान व्यापक जन आंदोलन  कर केंद्र सरकार से समझौता रद्द कराने के लिए संघर्ष करेंगे।
    हरियाणा से अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह ने  कहा कि हरियाणा में गेहूं खरीद के नए निर्देश जारी किए गए थे जिसके खिलाफ हमने लड़कर निर्देशों को शिथिल करने में कामयाबी हासिल की  हैं।
     उन्होंने कहा कि सरकार ने कृषि का अलग से एक निगम बना दिया है जो वास्तव में धीरे-धीरे क्राश सब्सिडी को खत्म कर किसान को अपने रहमों-करम पर छोड़ देगा।
   महाराष्ट्र से किसंस की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रो. सुशीला ताई मोराळे ने कहा कि प्याज़ किसानों को लागत भी नहीं मिल रही है। 
उन्होंने बताया कि प्याज़ की फसल तैयार है लेकिन खरीदने वाला कोई नहीं है। महाराष्ट्र का एक किसान जो  बैंगलोर प्याज़ बेचने गया लेकिन सब खर्च काटकर उसे 1 रूपया मिला। जो बहुत ही शर्मनाक है। 
    पंजाब किसान यूनियन के महासचिव गुरनाम सिंह भिक्की ने बताया कि 15 मई को संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में किसानों की लंबित मांगों को लेकर हजारों किसान राज्यपाल भवन की ओर मार्च करेंगे। 
    भाकियू नैन के राष्ट्रीय अध्यक्ष जोगिंदर सिंह नैन ने कहा कि सरकार द्वारा 24 घंटे में भुगतान के दावे झूठे साबित हुए हैं और किसानों को अनाज बेचने के कई दिनों बाद भी भुगतान नही हो पा रहा है।
     उन्होंने कहा कि सरकार का मकसद किसानों को मंडी प्रणाली से दूर करना है।
 राष्ट्रीय किसान मंच के प्रदेश उपाध्यक्ष  हरजिंदर सिंह ने कहा कि पंजाब से क्रांति की शुरुआत हुई है। पंजाब के किसानों ने संघर्ष के माध्यम से एक-एक दाना खरीद करने को सरकार को मजबूर किया है।
     शेतकरी विकास मंच के प्रदेश अध्यक्ष हुसैन खान ने कहा कि महाराष्ट्र में किसानों की आय बेहद कम होने से किसान आत्महत्या करने को मजबूर हैं। विदर्भ में 80% कृषि असिंचित और 20% कृषि सिंचित है । किसानों  की वार्षिक आय 80 हजार रुपए है जो जीवन यापन और मुलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति करने के लिए पर्याप्त नहीं है। कर्ज के चलते किसान आत्महत्या कर रहे हैं।
  छत्तीसगढ़ से  भा कि यू के प्रदेश महासचिव तेजराम विद्रोही ने खाद  के संकट और कम उत्पादन के लिए सरकार की नीतियों को जिम्मेदार बताते हुए कहा कि वर्ष 2025-26 में किसानों को पर्याप्त खाद उपलब्ध नहीं हो पाया जिसकी वजह से 25 प्रतिशत उत्पादन में कमी आई। सरकार चाहती है कि कम उत्पादन हो ताकि कम से कम खरीद की जा सके।
  मालवा निमाड़ क्षेत्र संयोजक  रामस्वरूप मंत्री ने मध्यप्रदेश में एमएसपी पर गेहूं खरीदी नहीं होने और भूमि अधिग्रहण मुआवजा लंबित रहने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री अपने आप को किसान हितैषी बता रहे हैं लेकिन मध्य प्रदेश के किसानों के गेहूं की एम एस पी पर खरीद नहीं हो रही है। 2017-18 का भूमि अधिग्रहण का मुआवजा भी नहीं दिया गया है। भूमि अधिग्रहण की गाइडलाइन में कोई बदलाव भी नहीं किया जा रहा है।
   रायसेन से किसंस के प्रदेश सचिव श्रीराम सेन ने कहा कि किसानों के स्लॉट बुकिंग और पंजीयन के समय ही सर्वर डाउन होना सरकार की नीयत पर प्रश्नचिन्ह लगा रहे है। 
    ग्वालियर से  किसंस के प्रदेश सचिव शत्रुघन यादव ने बिजली स्पार्किंग से फसल नुकसान पर पर्याप्त मुआवजा नहीं मिलने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि ग्वालियर में एक किसान का लाखों का गेहूं जल गया जिसका 10 प्रतिशत भी मुआवजा नहीं दिया गया। किसानों को मुआवजा लेने हेतु उपभोक्ता फोरम जाना चाहिए। 
    कि सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष लालमणि त्रिपाठी ने रीवा क्षेत्र में जंगली जानवरों और छुट्टा पशुओं से फसल नुकसान रोकने हेतु पंचायत स्तर पर बाड़ेबंदी कराने और उचित मुआवजे की मांग की। 
    किसंस के प्रदेश सचिव संतकुमार पटेल ने मंडियों में बारिश से बचाव के इंतजाम नहीं होने और बिजली विभाग द्वारा मनमानी वसूली का आरोप लगाते हुए कहा कि मंडियों में अनाज को बारिश से बचाने के कोई प्रबंध नहीं है। बिजली विभाग द्वारा 3 एच पी की मोटर का 5 एच पी बताकर मनमानी वसूली की जा रही है।
किसान पंचायत का लाइव प्रसारण बहुजन संवाद पर किया गया।