आमला। शासकीय अनुसूचित जाति बालक छात्रावास रतेड़ाकला में रविवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) शैलेन्द्र बड़ोनिया ने औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान छात्रावास की हालत बेहद खराब मिली। यहां न तो अधीक्षक मौजूद थे और न ही रसोइया, वाटरमैन तथा भृत्य। सबसे हैरानी की बात यह रही कि छात्रावास में दर्ज 33 विद्यार्थियों में से एक भी छात्र मौके पर नहीं मिला। शासन की ओर से संचालित इस छात्रावास की बदहाल व्यवस्था ने जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एसडीएम ने मौके पर नाराजगी जताते हुए पूरी स्थिति का संज्ञान लिया। लंबे समय से लापरवाही के चलते छात्रावास संचालन केवल कागजों तक सीमित नजर आया। निरीक्षण के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है।
*रिकॉर्ड में 33 छात्र, सूचना पटल पर 24 उपस्थिति पर उठे सवाल*
निरीक्षण के दौरान छात्रावास के सूचना पटल पर केवल 24 विद्यार्थियों की संख्या दर्ज मिली, जबकि दस्तावेजों में 33 छात्रों का पंजीयन बताया गया। रिकॉर्ड और वास्तविक आंकड़ों में यह बड़ा अंतर प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है। इससे उपस्थिति पंजियों, भोजन व्यवस्था और बजट उपयोग की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं। अधिकारियों को आशंका है कि लंबे समय से व्यवस्थाएं बिना निगरानी के संचालित हो रही थीं। छात्रों की अनुपस्थिति ने यह भी संकेत दिया कि छात्रावास नियमित रूप से संचालित नहीं हो रहा। यदि विद्यार्थी यहां नहीं रह रहे तो उनके नाम पर मिलने वाली सुविधाओं का लाभ किसे मिल रहा है, यह भी जांच का विषय बन गया है। एसडीएम ने संबंधित रजिस्टरों की जांच के निर्देश दिए हैं। मामले में जवाबदेही तय होने की संभावना है।
*गंदगी, टूटे दरवाजे और बंद लाइटों ने खोली बदहाली की तस्वीर*
एसडीएम ने जब छात्रावास परिसर और कमरों का निरीक्षण किया तो चारों तरफ गंदगी पसरी मिली। ऐसा लगा मानो लंबे समय से यहां साफ-सफाई ही नहीं हुई हो। मच्छर रोधी जालियां टूटी पड़ी थीं, जिससे छात्रों के स्वास्थ्य पर खतरा बना हुआ है। कई कमरों में लाइट व्यवस्था बंद मिली और पंखों के स्विच भी खराब पाए गए। कुछ कमरों के दरवाजे टूटे हुए थे तो कुछ जगह दरवाजे गायब मिले। शौचालयों की हालत भी बेहद खराब थी और उनमें दुर्गंध फैली हुई थी। मूलभूत सुविधाओं के अभाव में यह छात्रावास विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित और उपयोगी नहीं दिखा। शासन के दावों के विपरीत यहां की वास्तविकता बदहाल नजर आई।
*एसडीएम सख्त, जिम्मेदारों पर कार्रवाई के संकेत*
निरीक्षण में सामने आई अव्यवस्थाओं पर एसडीएम शैलेन्द्र बड़ोनिया ने गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने संबंधित विभागीय अधिकारियों और छात्रावास प्रबंधन को तत्काल सुधार कार्य शुरू करने के निर्देश दिए। साफ कहा गया कि छात्रावास जैसी संवेदनशील व्यवस्था में लापरवाही किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन ने अनुपस्थित कर्मचारियों से जवाब तलब करने की तैयारी शुरू कर दी है। वहीं छात्रों की वास्तविक उपस्थिति, भोजन व्यवस्था और खर्चों की भी जांच कराई जा सकती है। इस कार्रवाई से क्षेत्र के अन्य छात्रावासों में भी हड़कंप मच गया है। अब देखना होगा कि जिम्मेदारों पर केवल नोटिस जारी होता है या ठोस कार्रवाई भी होती है। क्षेत्रीय लोगों ने भी दोषियों पर सख्त कदम उठाने की मांग की है

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