अनूपपुर। सोमवार की सुबह अनूपपुर जिले मुख्यालय को इतिहास के पन्नों में दर्ज करती नजर आई। जहां किसान समर्थन मूल्य और अघोषित बिजली कटौती के खिलाफ सड़कों पर ट्रैक्टर रैली लेकर चक्का जाम तक किये। लगभग रात 11:00 बजे यह धरना किसानों का तब समाप्त हुआ, जब प्रशासन ने उनकी मांगों को उचित ठहराते हुए सारी मांगे मानी। हालांकि इस दौरान दो भागों में बांटा जिला मुख्यालय में रह रहे रहवासियो को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
11 घंटे से भी अधिक का जाम अनूपपुर जिला मुख्यालय का का सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन रहा तो वही प्रशासन को भी कई पालियों में हुई वार्ता के चलते काफी मस्कत करनी पड़ी। हालांकि किसानों का यह आंदोलन राजनीति के बैनर के बिना ही सफल बताया जा रहा है।
तय समय पर जब जिला प्रशासन के द्वारा किसानों को राहत नही मिली, तो किसानों ने सोमवार को यह उग्र प्रदर्शन किया जिसमें सैकड़ो की संख्या में ट्रैक्टरों के माध्यम से सड़कों पर पहले तो रैलियां निकाली गई। उसके बाद अंडर ब्रिज के पास वाहनों का चक्का जाम कर दिया गया। पहले तो किसानों ने कलेक्टर कार्यालय और बिजली विभाग घेराव की बात कही थी लेकिन प्रशासन और पुलिस की आपसी खींच दान के बीच किसानों ने अंडर ब्रिज मार्ग को ही पूरी तरह जाम कर दिया। इस दौरान राहगीरों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा तो वही इस भीड़ में किसानों ने अपनी शालीनता का परिचय देते हुए रैली के दौरान आ रहे एंबुलेंस को भी रास्ता मुहैया कराया लेकिन 11 घंटे की मसक्कत के बाद जिला प्रशासन ने किसानों की मांगों में अपनी सहमति जाहिर कर उनकी धरना प्रदर्शन को समाप्त कराया।
25 मई का दिन जहां नौतपा की शुरुआत रही वहीं किसानों का उग्र प्रदर्शन और 11 घंटे से भी अधिक का जाम जिला मुख्यालय के इतिहास के पन्नों में दर्ज कराया किसानों के प्रदर्शन पूरी तरह गैर राजनीतिक बताया गया। कई पालियों में हुई बातचीत आखिरकार रात11:00 बजे लिखित आश्वासन के साथ जिला प्रशासन को किसानों को देना पड़ा,उसके बाद यह चक्का जाम समाप्त हुआ। किसानों के द्वारा बताया गया कि लगातार फसल बेचने के लिए स्लाट बुक की समस्या के चलते उनका खाद्यान्न नहीं बिक पाया और पोटल भी बंद हो चुका है दूसरी तरफ जिला मुख्यालय से महज 5 किलोमीटर दूर एजी फीडर के चलते एग्रीकल्चर जमीनों पर रह रहे किसानों के घरों की बिजलियां भी रात की पाली में बंद नजर आई जिससे किसान और उसका परिवार रात जागरण करके अपना जीवन यापन कर रहा था धीरे-धीरे किसानों का यह गुस्सा धरना प्रदर्शन और चक्का जाम में तब्दील हुआ जिसके चलते प्रशासन को उनकी मांगे पूरी करनी पड़ी।

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