कुबरी में रेत माफिया का तांडव: प्रशासन मौन, सिस्टम बेबस या शामिल?

मैहर: जिले के कुबरी में अवैध रेत कारोबार ने अब खुलेआम सिस्टम को चुनौती दे दी है। हालात इतने बेकाबू हैं कि आरोप लग रहे हैं कि प्रशासन की सांठगांठ से यह काला खेल बेखौफ जारी है। करोड़ों की रेत खुलेआम खप गई, लेकिन जिम्मेदार महकमे या तो चुप हैं या सवालों के घेरे में।

रामनगर थाने की स्थिति इस पूरे नेटवर्क की ताकत को बयां करती है, जहां लाइन हाजिर आरक्षक को दोबारा भेजने तक के लिए पुलिस अधिकारी मजबूर नजर आए। यह संकेत है कि दबाव कितना गहरा है और पकड़ कितनी मजबूत।

सूत्रों के मुताबिक, इस अवैध धंधे में सत्ता और विपक्ष दोनों के कुछ तत्वों का गठजोड़, प्रशासनिक संरक्षण और कथित तौर पर कुछ मीडिया चेहरों की भूमिका भी सामने आ रही है। सवाल उठता है—क्या कानून केवल कागजों में रह गया है?

स्थिति इतनी भयावह बताई जा रही है कि जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक से लेकर प्रदेश सरकार तक इस पर लगाम लगाने में असमर्थ दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में अब मांग उठ रही है कि केंद्र सरकार सीधे हस्तक्षेप करे और CBI सहित विशेष फोर्स तैनात कर इस रेत माफिया के नेटवर्क को ध्वस्त करे।

जिले की CID और IB से भी अपील की जा रही है कि हफ्तों-महीनों तक गुप्त निगरानी कर यह पता लगाया जाए कि वसूली का खेल किन-किन विभागों तक फैला है और किस स्तर तक संरक्षण मिल रहा है। साथ ही संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की आर्थिक पृष्ठभूमि की भी गहन जांच हो।

अब निगाहें केंद्र के गृह मंत्री पर टिकी हैं—क्या वे इस संगठित लूट पर सख्त कार्रवाई करेंगे? या कुबरी की रेत यूं ही सिस्टम को चुनौती देती रहेगी?

यह केवल अवैध खनन नहीं, बल्कि शासन-प्रशासन की साख पर सीधा प्रहार है।