टीकमगढ़ के युवा वैज्ञानिक प्रखर ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर किया कमाल, नासा के साथ खोजा नया क्षुद्रग्रह


700 टीमों और 8 हजार वैज्ञानिकों की प्रतिस्पर्धा में बनाई जगह; P12IB9xP नाम से दर्ज हुई खोज

पुष्टि के बाद भारत को मिलेगा नामकरण का अधिकार

 टीकमगढ़। जिले के युवा वैज्ञानिक और वर्तमान में भोपाल स्थित बंसल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (BIST) के इंजीनियरिंग छात्र प्रखर विश्वकर्मा ने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। प्रखर ने अपनी टीम ‘स्नो स्टार’ के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय एस्टेरॉयड सर्च कैंपेन के दौरान P12IB9xP नामक एक नए क्षुद्रग्रह की खोज की है। यह अभियान नासा और हार्डिन-सिमन्स यूनिवर्सिटी के संयुक्त तत्वावधान में संचालित किया गया था।
इस वैश्विक अभियान में दुनिया भर से करीब 700 से अधिक टीमों और लगभग 8 हजार सिटिजन साइंटिस्ट्स ने भाग लिया था। अभियान के दौरान कुल 15 हजार से अधिक संभावित डिटेक्शन्स दर्ज किए गए, लेकिन कड़े वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद नासा और अंतरराष्ट्रीय खगोलीय संघ (IAU) ने इनमें से केवल 21 खोजों को अंतिम सूची में शामिल किया। इन चुनिंदा खोजों में भारत की टीम ‘स्नो स्टार’ की खोज भी शामिल है, जिसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
टीम लीडर रोशनी शर्मा के नेतृत्व में प्रखर विश्वकर्मा, पद्माक्षी सारस्वत, राहुल शर्मा और जसलीन ने इस मिशन पर कई हफ्तों तक लगातार काम किया। टीम को अमेरिका के हवाई में स्थित विश्व के अत्याधुनिक पैन-स्टार्स टेलीस्कोप से ली गई उच्च गुणवत्ता वाली खगोलीय तस्वीरें भेजी गई थीं। इन तस्वीरों का विश्लेषण एस्ट्रोमेट्रिका सॉफ्टवेयर के माध्यम से किया गया, जिसमें अंतरिक्ष में गतिमान पिंडों की पहचान की गई।
प्रखर विश्वकर्मा ने बताया कि फिलहाल इस खोज को “प्रारंभिक डिटेक्शन” का दर्जा मिला है। अगले 3 से 4 वर्षों तक अंतरराष्ट्रीय खगोलीय संघ (IAU) द्वारा इस क्षुद्रग्रह की कक्षा और डेटा का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा। पुष्टि होने के बाद इसे “प्रोविजनल डिटेक्शन” का दर्जा मिलेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार यह एक दुर्लभ उपलब्धि है, क्योंकि लगभग 10 हजार खोजों में से केवल 1 या 2 ही प्रोविजनल स्टेटस तक पहुंच पाती हैं। यदि यह प्रक्रिया सफल रहती है, तो भविष्य में इस क्षुद्रग्रह का आधिकारिक नाम रखने का अधिकार भी टीम को प्राप्त होगा।
गौरतलब है कि बंसल ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट्स के छात्र प्रखर विश्वकर्मा पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय तकनीकी प्रोजेक्ट्स पर काम कर चुके हैं। उनकी प्रतिभा के चलते उन्हें ‘मिसाइल मैन ऑफ एमपी’ के नाम से भी जाना जाता है। संस्थान के प्रबंधन और शिक्षकों ने प्रखर की इस उपलब्धि को कॉलेज, प्रदेश और देश के लिए गर्व का विषय बताया है।