महाशिवरात्रि उत्सव 2026 : मातृधाम छिपरी में षष्ठम दिवस पर सेवा, संतुलन और भक्ति का संदेश*
> भजन सम्राट लखबीर सिंह लख्खा की ओजस्वी प्रस्तुति से गुंजायमान हुई संध्या
*परम पूज्य रविशंकर जी महाराज ‘रावतपुरा सरकार’* के मंगल सान्निध्य में मातृधाम छिपरी में आयोजित *महाशिवरात्रि उत्सव 2026* का षष्ठम दिवस आध्यात्मिक अनुशासन, सामाजिक संदेश और भक्ति की गूंज के साथ सम्पन्न हुआ।
प्रातःकालीन वैदिक अनुष्ठानों के पश्चात परम पूज्य महाराज श्री ने भक्तों से आत्मीय भेंट कर उनका कुशलक्षेम जाना तथा स्नेहपूर्ण संवाद किया। तत्पश्चात प्रतिदिन की भाँति महामृत्युंजय यज्ञ में श्रद्धालुओं ने सहभागी होकर शांति, संतुलन और कल्याण के संकल्प को अर्पित किया।
इस अवसर पर *श्रीमति कृष्णा गौर, टीकमगढ़ जिले की प्रभारी मंत्री* , ने भी मातृधाम छिपरी पहुंचकर दर्शन किए तथा उत्सव की गरिमा में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
इसके उपरांत श्रीमद्भागवत कथा के दौरान व्यासपीठ से साध्वी पीताम्बरा दीदी ने जीवन संतुलन पर गहन संदेश दिया गया। कथा में कहा गया कि धर्म केवल बाहरी आचरण या अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि घर-परिवार की जिम्मेदारियों के निर्वहन में भी निहित है।
संदेश दिया गया—
*“यदि कोई व्यक्ति प्रतिदिन मंदिर जाता है, लेकिन अपने कर्तव्यों की उपेक्षा करता है, तो वह भक्ति अधूरी रह जाती है। जो आपके लिए दिन-रात परिश्रम करता है, उसकी सेवा और सम्मान ही सच्चा धर्म है।”*
इस प्रेरक विचार ने उपस्थित श्रद्धालुओं को यह समझाया कि सच्ची भक्ति जीवन के संतुलन, सेवा और उत्तरदायित्व में निहित है।
सायंकालीन बेला में सांस्कृतिक संध्या का विशेष आकर्षण रहे *विश्वविख्यात भजन सम्राट लखबीर सिंह लख्खा।* जागरण और भक्ति संगीत की दुनिया में अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाले लख्खा जी की ओजस्वी वाणी ने मातृधाम छिपरी को भक्ति के चरम भाव में डुबो दिया। उनके प्रत्येक भजन के साथ श्रद्धालुओं की भावनाएँ स्वर बनकर गूंज उठीं। पंडाल “जय माता दी” और “हर-हर महादेव” के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा, और वातावरण एक विराट जागरण का स्वरूप लेता प्रतीत हुआ।
महाशिवरात्रि उत्सव 2026 का षष्ठम दिवस इस प्रकार धर्म, सेवा, कर्तव्य और भक्ति के संतुलित संदेश के साथ श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणास्पद बन गया।

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