मुंगावली - रविवार को नगर में भगवान परशुराम जी के पावन प्रकटोत्सव के अवसर पर एक भव्य एवं आकर्षक शोभायात्रा निकाली गई, जिसने पूरे शहर को भक्ति और उल्लास के रंग में रंग दिया। सुबह से ही नगर में उत्सव का माहौल था और श्रद्धालु व समाज जन बड़ी संख्या में इस आयोजन में एकत्रित हुए।
मलखावनी बावड़ी स्थित मंदिर से शोभायात्रा का शुभारंभ भगवान परशुराम जी की विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुई। भगवान परशुराम जी की सुसज्जित झांकी और रथ लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे। विभिन्न स्थानों से आए समाज जन पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए और हाथों में भगवा ध्वज लिए हुए “जय परशुराम” के जयघोष से नगर गूंजता रहा। ढोल-नगाड़ों, बैंड-बाजों और भजन-कीर्तन की मधुर धुनों ने पूरे नगर को भक्तिमय बना दिया।
यात्रा के मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं द्वारा फूलों की वर्षा कर शोभायात्रा का भव्य स्वागत किया गया। कई सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने प्रसाद वितरण एवं जल सेवा की व्यवस्था भी की, जिससे आयोजन और भी गरिमामय बन गया। बच्चों, युवाओं और महिलाओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने इस शोभायात्रा को और भी विशेष बना दिया।     इस अवसर पर सकल ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष एवं कृषि वैज्ञानिक आशीष पालीवाल ने समाज जनों को संबोधित करते हुए कहा कि यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी आस्था, संस्कृति और एकता का प्रतीक है।
भगवान परशुराम जी, जिन्हें भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है, उन्होंने अपने जीवन में धर्म की रक्षा और अधर्म के नाश का संदेश दिया। उनका जीवन हमें सिखाता है कि जब भी समाज में अन्याय बढ़े, तब हमें सत्य और न्याय के पक्ष में खड़े होना चाहिए।
 यह शोभायात्रा हमें यह संदेश देती है कि हमें अपने संस्कारों, परंपराओं और संस्कृति को संजोकर ओर सहज कर रखना है। जिस प्रकार आज नगर में सभी संप्रदाय, सभी उम्र के लोग एक साथ मिलकर इस आयोजन को सफल बना रहे हैं, यह हमारी एकता और भाईचारे का सबसे अच्छा उदाहरण है।
भगवान परशुराम जी का जीवन हमें शक्ति के साथ संयम, पराक्रम के साथ विनम्रता और धर्म के प्रति समर्पण का संदेश देता है। हमें उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाकर समाज को एक बेहतर दिशा देनी है।
अंत में, मैं यही कामना करता हूँ कि भगवान परशुराम जी की कृपा हम सभी पर बनी रहे, हमारा नगर सुख, शांति और समृद्धि की ओर अग्रसर हो, और हम सभी मिलकर ऐसे ही धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों को सफल बनाते रहें।