सहजपुर (केसली): संतशिरोमणि 108 विद्यासागर मुनिराज के शिष्य और प्रखर प्रवक्ता 108 प्रमाणसागर मुनिराज के ग्राम चौका से सहजपुर आगमन पर श्रद्धालुओं ने छह अन्य मुनिराजों के साथ भव्य स्वागत किया। इस पावन अवसर पर समूचा नगर धर्ममय वातावरण में डूब गया, जहां श्रद्धालुओं ने जगह-जगह पर मंगल द्वार, पुष्पवर्षा और जयकारों के साथ मुनिराजों का अभिनंदन किया।

धर्मसभा में 108 प्रमाणसागर मुनिराज का संदेश

धर्मसभा को संबोधित करते हुए 108 प्रमाणसागर मुनिराज ने कहा, “सभी प्राणियों का हित और परिणामों की विशुद्धि ही उत्कृष्ट अहिंसा है।” उन्होंने बताया कि सभी धर्मों का सार परहित है। तुलसीदास जी के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अहिंसा ही सबका हित करने वाली है, क्योंकि किसी को पीड़ा पहुँचाना ही हिंसा है और वही सबसे बड़ा पाप है।

मुनिराज ने कहा कि मनुष्य स्वभाव से दयालु और करुणावान होता है। किसी की निंदा नहीं करनी चाहिए, क्योंकि निंदा स्वयं एक बुरा गुण है। हालांकि, सत्य का विवेकपूर्वक उद्घाटन आवश्यक है। विवेक ही मनुष्य को पशु-पक्षियों से भिन्न बनाता है और यही विवेक धर्म का मूल है।

संप्रदायों के बीच शांति के लिए उपदेश

उन्होंने कहा कि क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे बुरे परिणामों को कोई भी अच्छा नहीं मानता, जबकि क्षमा को सभी श्रेष्ठ मानते हैं और क्षमा को अपनाने वाला व्यक्ति धर्मात्मा कहलाता है। वर्तमान समय में संप्रदायों की चर्चा के कारण बैर-विरोध बढ़ रहा है। यदि सभी उपदेशक क्षमा, संयम और अहिंसा का उपदेश दें तो समाज में स्वतः शांति स्थापित हो जाएगी।

जीवन का लक्ष्य और परिणामों की विशुद्धि

108 प्रमाणसागर जी ने “जियो और जीने दो” को मानव सभ्यता का मुख्य आधार बताते हुए कहा कि यदि हमारे परिणाम विशुद्ध होंगे तो निश्चित रूप से कर्मों का क्षय होगा, लेकिन यदि परिणाम अशुद्ध बने रहे तो नरक आदि दुर्गतियाँ प्रतीक्षा कर रही हैं। क्रोध, मान, माया और लोभ दुःख के ही कारण हैं।

उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे शिशु के दांत स्वाभाविक रूप से उजले होते हैं, लेकिन तंबाकू आदि के सेवन से वे गंदे हो जाते हैं, उसी प्रकार मनुष्य का जन्म उज्ज्वल भावों के साथ होता है, किंतु ईर्ष्या और द्वेष के कारण वह अपने जीवन को कलुषित कर लेता है। अतः परिणामों की विशुद्धि ही जीवन का एकमात्र लक्ष्य होना चाहिए।

धर्मलाभ के लिए उमड़ा जनसैलाब

इस अवसर पर केसली, सहजपुर, तेंदूखेड़ा, गाडरवारा सहित आसपास के क्षेत्रों से हजारों की संख्या में सभी वर्गों के श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम में धर्मलाभ लेने के लिए जनसमूह उमड़ पड़ा।