क्रांतिकारी राष्ट्रसंत आचार्य श्री गुप्तिनंदीजी गुरुदेव का 36वाँ चातुर्मास फलटन नगरी में, 23 वर्षों बाद पुनः धर्मोदय का ऐतिहासिक संयोग
फलटन (महाराष्ट्र) | विशेष संवाददाता
जैन समाज के लिए अत्यंत हर्ष, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास का विषय है कि क्रांतिकारी राष्ट्रसंत परम पूज्य आचार्य श्री 108 गुप्तिनंदीजी गुरुदेव का 36वाँ चातुर्मास इस वर्ष महाराष्ट्र की पावन भूमि फलटन नगरी में सम्पन्न होने जा रहा है। विशेष बात यह है कि 23 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद आचार्य श्री का पुनः धर्मोदय चातुर्मास फलटन में होने जा रहा है, जिससे संपूर्ण क्षेत्र का जैन समाज उत्साह और भक्ति से सराबोर है।
आचार्य श्री के मंगल सान्निध्य में चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन धर्मसभा, प्रवचन, स्वाध्याय, पूजन, तप, आराधना, संस्कार शिविर तथा अनेक धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। यह चातुर्मास केवल फलटन ही नहीं, बल्कि देशभर के श्रद्धालुओं के लिए धर्म, संयम और आत्मकल्याण का अनुपम अवसर सिद्ध होगा।
1 अगस्त 2026 को चातुर्मास कलश स्थापना महोत्सव भव्य एवं धार्मिक वातावरण में सम्पन्न होगा। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति रहने की संभावना है। आयोजन समिति ने देशभर के समाजजनों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त करने का आग्रह किया है।
इस वर्ष का आयोजन कई विशेष संयोगों से भी युक्त रहेगा। चातुर्मास के दौरान आचार्य श्री का 54वाँ अवतरण दिवस श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाया जाएगा। साथ ही गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व भी गुरुदेव के सान्निध्य में मनाने का सौभाग्य प्राप्त होगा। श्रद्धालुओं को रक्षा सूत्र (रक्षा मंत्र) प्रदान किए जाएंगे तथा दूध-शक्कर योग सहित अनेक धार्मिक आयोजनों में सहभागी बनने का अवसर मिलेगा।
फलटन नगरी में आचार्य श्री के आगमन से संपूर्ण क्षेत्र आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित हो उठा है। समाजजन आयोजन की तैयारियों में पूरे उत्साह के साथ जुटे हुए हैं। नगर को आकर्षक धार्मिक सजावट से सजाया जा रहा है तथा बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए व्यापक व्यवस्थाएँ की जा रही हैं।
आयोजन समिति ने देशभर के जैन समाज एवं धर्मप्रेमियों से आग्रह किया है कि वे 1 अगस्त 2026 को फलटन पहुँचकर इस ऐतिहासिक एवं पुण्यदायी चातुर्मास के शुभारंभ के साक्षी बनें तथा गुरुदेव के मंगल आशीर्वाद से अपने जीवन को धन्य बनाएं।
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