बागड़ प्रांत में पहली बार बेटियों को मिले विवाह पूर्व ब्रह्मचर्य एवं संस्कारों के सूत्र
अनंतमती श्राविका संस्कार शिविर में 250 बेटियों ने लिया सहभागिता का संकल्प, एक बेटी ने अंगीकार किया आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत
घाटोल, बांसवाड़ा। (संवाददाता मुकेश जैन)
धर्मनगरी घाटोल में पूज्य मुनिवर श्री प्रणम्य सागर महाराज जी की प्रेरणा तथा आर्यिका श्री प्रशममति माताजी के सान्निध्य में आयोजित अनंतमती श्राविका संस्कार शिविर में बागड़ प्रांत की लगभग 250 बेटियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। शिविर का उद्देश्य बेटियों को धर्म, संस्कार, मर्यादा, आत्मसम्मान एवं ब्रह्मचर्य के मूल्यों से जोड़ते हुए उनके जीवन को सदाचार और संयम की दिशा प्रदान करना रहा।
शिविर के दौरान बेटियों को ऐसे छोटे-छोटे लेकिन जीवन को संस्कारित करने वाले अनेक नियम बताए गए, जिन्हें दैनिक जीवन में अपनाकर वे अपने व्यक्तित्व को अनुशासित एवं संस्कारित बना सकें। इनमें रात्रि में मोबाइल का उपयोग नहीं करना, प्रतिदिन माता-पिता के चरण स्पर्श कर जय जिनेंद्र करना, रात्रि भोजन का त्याग करना तथा जमीकंद का सेवन नहीं करना सहित विभिन्न धार्मिक एवं अनुशासनात्मक नियम शामिल रहे।
आर्यिका संघ द्वारा सभी बेटियों को धर्म एवं संस्कारों से जोड़ने के लिए स्वाध्याय की पुस्तिकाएं एवं व्रत संबंधी धार्मिक साहित्य भी प्रदान किया गया। बेटियों को प्रेरणा दी गई कि वे अपने माता-पिता के कुल के साथ-साथ जैन समाज की गौरवशाली परंपराओं की मर्यादा को सदैव बनाए रखें तथा विवाह से पूर्व अपने जीवन में पवित्रता, शील एवं ब्रह्मचर्य के संस्कारों को दृढ़ता से अपनाएं।
बेटियां समाज और राष्ट्र की अमूल्य धरोहर
शिविर में बेटियों को यह संदेश दिया गया कि बेटियां केवल किसी एक परिवार की नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की अमूल्य धरोहर हैं। बदलते सामाजिक परिवेश में उन्हें धार्मिक शिक्षा, अच्छे संस्कार, आत्मसम्मान और जीवन-मूल्यों से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। संयम एवं संस्कारों के माध्यम से बेटियों को अनुचित प्रभावों से दूर रखते हुए उनके जीवन को सकारात्मक दिशा देना ही शिविर की प्रमुख भावना रही।
श्वेत वस्त्रों में दिखाई दी संस्कारों की सुंदर तस्वीर
शिविर की विशेषता यह रही कि सभी प्रतिभागी बेटियों को श्वेत वस्त्र प्रदान किए गए। श्वेत वस्त्रों में सामूहिक रूप से बैठकर बेटियों ने धार्मिक शिक्षा, स्वाध्याय एवं संस्कारों का प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस दौरान शिविर परिसर का वातावरण पवित्रता, अनुशासन और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत दिखाई दिया।
प्रमाण-पत्र देकर किया सम्मानित
शिविर के समापन अवसर पर सभी प्रतिभागी बेटियों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। वहीं बेटियों के मध्य से एक अनंतमती श्राविका का चयन भी हुआ। समाज की ही एक बेटी ने इस अवसर पर आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत अंगीकार कर अपने जीवन को संयम एवं मोक्षमार्ग की दिशा में समर्पित करने का संकल्प लिया। यह भावपूर्ण क्षण शिविर के साथ-साथ पूरे समाज के लिए गौरव और प्रेरणा का विषय बना।
यह आयोजन महज एक संस्कार शिविर नहीं, बल्कि बेटियों के जीवन में धर्म, संस्कार, संयम, शील और ब्रह्मचर्य की मजबूत नींव रखने वाला प्रेरणादायी अभियान बनकर सामने आया। शिविर ने यह संदेश दिया कि संस्कारित बेटियां ही संस्कारित परिवार, सशक्त समाज और उज्ज्वल राष्ट्र के निर्माण की आधारशिला बनती हैं।
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