सुंदर वचन : संयम से मिटता है मोह और अज्ञान का अंधकार
आत्मा की शुद्धि ही सच्ची साधना, संयम मोक्ष का मार्ग — आचार्य श्री 108 सुंदर सागर जी महाराज
सिंगोली। (संवाददाता मुकेश कुमार जैन)
दिव्य तपस्वी आचार्य श्री 108 सुंदर सागर जी महाराज ने धर्म एवं आत्मसाधना का संदेश देते हुए कहा कि “जिस मन में संयम का दीप जल जाता है, उसके जीवन से मोह और अज्ञान का अंधकार मिट जाता है।”
उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में संयम केवल बाहरी अनुशासन नहीं, बल्कि आत्मा को शुद्ध करने की साधना है। जब व्यक्ति अपने विचारों, इच्छाओं और कर्मों पर संयम स्थापित करता है, तब उसके भीतर सकारात्मकता और आत्मिक शांति का प्रकाश फैलने लगता है।
आचार्य श्री ने कहा कि आत्मा की शुद्धि ही सच्ची साधना है और संयम ही मोक्ष की ओर ले जाने वाला मार्ग है। सांसारिक मोह और अज्ञान मनुष्य को आत्मस्वरूप से दूर करते हैं, जबकि संयम उसे अपने वास्तविक स्वरूप की ओर ले जाता है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि जीवन में संयम, आत्मचिंतन और सदाचार को अपनाकर अपने भीतर ज्ञान एवं साधना का दीप प्रज्वलित करें। यही मानव जीवन को सार्थक बनाने का श्रेष्ठ मार्ग है।
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