सिवनी -:

घंसौर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक युवक की मौत के बाद शुक्रवार को हालात तनावपूर्ण हो गए। आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने युवक का शव मंडला–लखनादौन स्टेट हाईवे पर रखकर चक्काजाम कर दिया। इसके चलते हाईवे के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात पूरी तरह ठप हो गया।

मृतक के परिजनों ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टरों पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जब वे गंभीर हालत में युवक को अस्पताल लेकर पहुंचे, तब किसी डॉक्टर ने उसका उपचार नहीं किया। परिजनों का आरोप है कि चिकित्सकीय उपचार के बजाय अस्पताल के एक चपरासी द्वारा युवक का उपचार किया गया, जिससे उसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई।

परिजनों का यह भी आरोप है कि युवक की हालत गंभीर होने पर उसे रेफर तो कर दिया गया, लेकिन अस्पताल की एम्बुलेंस लंबे समय से खराब होने के कारण उपलब्ध नहीं हो सकी। उनका कहना है कि उन्होंने लगभग चार घंटे तक एम्बुलेंस का इंतजार किया, लेकिन वाहन नहीं पहुंचा। उनका दावा है कि समय पर एम्बुलेंस और उचित उपचार मिल जाता तो युवक की जान बच सकती थी।

घटना से नाराज परिजनों और ग्रामीणों ने दोषी डॉक्टरों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई, अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की उच्चस्तरीय जांच तथा बीएमओ भारती सोनकेशरिया को तत्काल हटाने की मांग की है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अस्पताल में लंबे समय से स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं और मरीजों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

घटना की सूचना मिलते ही मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) घंसौर, पूरा राजस्व अमला, पुलिस अनुविभागीय अधिकारी नम्रता सिंधिया सहित कई थानों का पुलिस बल मौके पर पहुंच गया और प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया। हालांकि समाचार लिखे जाने तक परिजन और ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े हुए थे।

प्रदर्शनकारी लगातार कलेक्टर नेहा मीना को मौके पर बुलाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक कलेक्टर स्वयं घटनास्थल पर पहुंचकर निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन नहीं देतीं, तब तक चक्काजाम समाप्त नहीं किया जाएगा।

समाचार लिखे जाने तक अस्पताल प्रबंधन और बीएमओ की ओर से परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।