17,500 रुपये छीने, धारदार हथियार से हमला और जबरन ले जाने का आरोप, कोतवाली में नहीं हुई FIR!

नाबालिग पीड़ित ने पुलिस पर सुनवाई नहीं करने का लगाया आरोप, एसपी कार्यालय पहुंचकर लगाई न्याय की गुहार

टीकमगढ़। शहर में कानून-व्यवस्था को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। 17 वर्षीय नाबालिग ने चार युवकों पर मारपीट, धमकी देकर 17,500 रुपये छीनने, साथी पर धारदार हथियार से हमला करने और उसे जबरन ई-रिक्शा में बैठाकर ले जाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित का कहना है कि घटना के बाद वह अपने परिजनों के साथ कोतवाली थाना पहुंचा, लेकिन शिकायत के बावजूद उसकी एफआईआर दर्ज नहीं की गई और न ही घायल का तत्काल चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया। इसके बाद पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है।

बस स्टैंड के पास घेरा, पैसों के लिए दी धमकी

पीड़ित मजीद खान निवासी जेल के सामने, बदान मोहल्ला ने एसपी को दिए आवेदन में बताया कि 12 सितंबर को वह अपने साथी हरदयाल रजक और शेरा के साथ बैकुंठी से टेंट के सामान के 17,500 रुपये लेकर पैदल वापस लौट रहा था। नए बस स्टैंड के पास देवा कुचबंदिया अपने तीन अन्य साथियों के साथ उसके पास पहुंचा। आरोप है कि चारों ने रुपये मांगते हुए धमकाया और कहा कि पैसे नहीं दिए तो मारपीट कर हाथ-पैर तोड़ देंगे तथा घर से पैसे मंगवाएंगे।

साथी पर धारदार हथियार से वार, कपड़ों पर लगा खून

पीड़ित के अनुसार रुपये नहीं देने पर आरोपियों ने उसके पास रखे 17,500 रुपये जबरन छीन लिए। इसी दौरान उसके साथी हरदयाल रजक पर तार काटने वाले धारदार हथियार से हमला कर दिया गया। पीड़ित का दावा है कि हमले में हरदयाल घायल हुआ और उसके शरीर से निकला खून उसकी टी-शर्ट सहित कपड़ों पर लग गया।

ई-रिक्शा में जबरन बैठाकर ले गए

शिकायत के मुताबिक घटना यहीं नहीं रुकी। आरोपियों ने नाबालिग मजीद को कथित तौर पर जबरन ई-रिक्शा में बैठाया और टोरिया की ओर ले गए। इस दौरान उसके परिजन और परिचित राजा व कल्लू उसे तलाशते हुए टोरिया पहुंचे। उन्हें आता देख आरोपी नाबालिग को वहां छोड़कर भाग गए।

कोतवाली पहुंचा पीड़ित, फिर भी नहीं दर्ज हुई FIR

घटना के बाद परिजन पीड़ित और घायल हरदयाल को लेकर कोतवाली थाना पहुंचे। पीड़ित का आरोप है कि वहां घटना की जानकारी देने के बावजूद तत्काल उचित कार्रवाई नहीं की गई। उसका यह भी आरोप है कि घायल का मेडिकल परीक्षण तक नहीं कराया गया। जब थाने से न्याय की उम्मीद पूरी नहीं हुई तो नाबालिग ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर पूरा घटनाक्रम आवेदन के माध्यम से बताया।

अब एसपी से उम्मीद—CCTV से लेकर ई-रिक्शा तक जांच की मांग

पीड़ित ने एसपी से आरोपियों के खिलाफ मारपीट, धमकी, रुपये छीनने, धारदार हथियार से हमला और जबरन ले जाने के आरोपों की जांच कर कानूनी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही 17,500 रुपये की बरामदगी, घायल हरदयाल का चिकित्सकीय परीक्षण, घटनास्थल के CCTV फुटेज, ई-रिक्शा की जानकारी और प्रत्यक्षदर्शियों के आधार पर जांच कराने की मांग की गई है। नाबालिग ने अपनी सुरक्षा की भी गुहार लगाई है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि गंभीर आरोपों की शिकायत लेकर थाने पहुंचा एक नाबालिग अगर पुलिस की चौखट से ही खाली हाथ लौट जाए, तो वह न्याय के लिए आखिर किस दरवाजे पर दस्तक दे?