मनुष्य जीवन बहुमूल्य, इसे व्यर्थ कार्यों में न गंवाएं : आचार्य श्री सुंदरसागर जी

निवाई। (संवाददाता मुकेश जैन)। दिव्य तपस्वी आचार्य श्री 108 सुंदरसागर जी महाराज ने जीवन की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मनुष्य जीवन अत्यंत बहुमूल्य है, इसलिए इसे व्यर्थ के कार्यों में नष्ट नहीं करना चाहिए। जीवन का वास्तविक उद्देश्य आत्मकल्याण और आत्मशांति की दिशा में आगे बढ़ना है।

आचार्य श्री ने कहा कि मनुष्य सांसारिक सुख-सुविधाओं और क्षणिक आकर्षणों में उलझकर अपने जीवन का अमूल्य समय गंवा देता है। जबकि वास्तविक सुख बाहरी साधनों में नहीं, बल्कि आत्मा की शांति और अंतर्मन की निर्मलता में निहित है।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने समय और जीवन के अवसर का सदुपयोग करते हुए संयम, सदाचार, धर्म और आत्मचिंतन की ओर बढ़ना चाहिए। यही मनुष्य जीवन की सच्ची सार्थकता है।

नमोस्तु गुरुदेव।