लूट की शिकायत के बाद मंगल की मौत, देवा फरार… अब कटघरे में कोतवाली पुलिस
समय रहते कार्रवाई होती तो क्या टल सकती थी मंगल की मौत? लूट के आरोपियों पर कार्रवाई को लेकर उठे गंभीर सवाल
टीकमगढ़। शनिवार को 17 वर्षीय नाबालिग से कथित लूट और मारपीट की शिकायत सामने आई और अगले ही दिन अनगढ़ा की तलैया में मंगल आदिवासी का शव मिलने से पूरे मामले ने गंभीर मोड़ ले लिया। मंगल के परिजनों का आरोप है कि वह देवा कुचबंदिया के साथ गया था और इसके बाद वापस नहीं लौटा। देवा के फरार बताए जाने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल कोतवाली पुलिस की कार्रवाई और उसकी टाइमिंग को लेकर खड़ा हो गया है।
नाबालिग के मुताबिक शनिवार सुबह करीब 10 बजे वह हरदयाल रजक और शेरा के साथ ₹17,500 लेकर पुराना बस स्टैंड जा रहा था। नए बस स्टैंड के पास देवा कुचबंदिया ने अपने तीन-चार साथियों के साथ उसे रोककर पैसे मांगे। विरोध करने पर मारपीट किए जाने का आरोप है। सूचना मिलने पर परिजन और परिचित मौके पर पहुंचे तो आरोपी वहां से चले गए।
इसी दौरान मंगल आदिवासी, निवासी पिछोर, जो रिश्तेदारी में टीकमगढ़ आया था, देवा के साथ कॉम्प्लेक्स से जाने की बात सामने आई। इसके बाद मंगल घर नहीं लौटा। परिजनों का दावा है कि शाम को देवा ने फोन कर कहा- “अपने आदमी को बचा सके तो बचा ले, डूब रहा है।” इसके बाद देवा के फरार होने की बात सामने आई।
मंगल की मौत के बाद पुलिस की कार्रवाई पर सवाल
पूरे घटनाक्रम में अब सवाल यह है कि जब लूट और मारपीट की शिकायत सामने आई थी, तब पुलिस ने कितनी तेजी से कार्रवाई की? क्या आरोपियों से तत्काल पूछताछ की गई? क्या देवा और उसके साथियों को तलाशा गया? क्या मंगल के देवा के साथ होने की जानकारी सामने आने के बाद उसकी तलाश शुरू की गई?
मंगल का शव मिलने के बाद ये सवाल और गंभीर हो गए हैं।
क्या समय पर कार्रवाई से टल सकती थी घटना?
यह जांच का विषय है कि मंगल की मौत किन परिस्थितियों में हुई। पुलिस प्रथमदृष्टया इसे डूबने से मौत मान रही है, लेकिन जब तक एफएसएल और अन्य जांच पूरी नहीं होती, मौत की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट नहीं हो सकतीं।
एसडीओपी राहुल कटरे के अनुसार पुलिस मौके पर पहुंची है और एफएसएल टीम जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि लूट के मामले, मंगल के देवा के साथ होने और पैसों से जुड़े विवाद समेत हर पहलू की जांच की जाएगी।
लेकिन सवाल यह है कि जांच अब क्यों तेज हुई, जब एक युवक की जान जा चुकी है?
अगर लूट की शिकायत के बाद पुलिस तत्काल सक्रिय होती, आरोपियों की तलाश करती और मंगल के देवा के साथ होने की जानकारी पर तत्काल कार्रवाई होती, तो क्या घटनाक्रम को किसी संभावित अनहोनी से पहले रोका जा सकता था-यह सवाल अब पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठ रहा है।
मौत की वजह जांच से सामने आएगी, लेकिन उससे पहले पुलिस को यह जवाब देना होगा कि शिकायत मिलने के बाद उसने क्या किया और कब किया? मंगल की मौत ने सिर्फ एक परिवार को नहीं झकझोरा है, बल्कि कोतवाली पुलिस की तत्परता और शुरुआती कार्रवाई को भी सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है।
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