विक्रमोत्सव 2026 का आरंभ, 139 दिवस का भव्य सांस्कृतिक उत्सव 

अपर मुख्य सचिव संस्कृति और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व श्री शिव शेखर शुक्ला ने घोषणा की है कि सृष्टि सृजनकर्ता महादेव के भव्य-दिव्य महाशिवरात्रि उत्सव के साथ 15 फरवरी को विक्रमोत्सव-2026 का औपचारिक शुभारंभ होगा। यह महोत्सव 139 दिनों तक चलने वाला सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों का अनूठा उत्सव होगा, जो 30 जून, 2026 तक आयोजित किया जाएगा।

उत्सव की विशेषताएँ:

  • महोत्सव का पहला चरण महाशिवरात्रि के अवसर पर 15 फरवरी को सुप्रसिद्ध संगीतकार प्रीतम की प्रस्तुति से आरंभ होगा।
  • दूसरा चरण 19 मार्च से 30 जून 2026 तक जलगंगा संवर्धन अभियान के तहत सम्पन्न होगा।
  • 41 से अधिक बहुआयामी गतिविधियों में 4 हजार से अधिक कलाकारों द्वारा प्रस्तुतियाँ दी जाएँगी।

इस अवसर पर संस्कृति संचालनालय के श्री एन.पी. नामदेव, मुख्यमंत्रीजी के संस्कृति सलाहकार श्रीराम तिवारी, और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

सम्राट विक्रमादित्य अलंकरण: देश का सबसे बड़ा सम्मान

गणनायक सम्राट विक्रमादित्य की स्मृति को सुरक्षित रखने के लिए 1 करोड़ 1 लाख रुपये का अंतर्राष्ट्रीय सम्मान स्थापित किया गया है। इसके साथ ही 21 लाख रुपये का राष्ट्रीय सम्मान और 5-5 लाख रुपये के तीन राज्य स्तरीय सम्मान भी दिए जाएँगे।

महोत्सव में अन्य प्रमुख गतिविधियाँ:

  • महाकाल वन मेला: उज्जैन के दशहरा मैदान में 12 से 16 फरवरी तक हर्बल उत्पादों की प्रदर्शनी और आयुर्वेदिक स्वास्थ्य जाँच।
  • शिव मंदिरों में महाशिवरात्रि मेले का आयोजन।
  • महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ परिसर में पौराणिक और ऐतिहासिक प्रदर्शनियाँ।
  • विक्रम नाट्य समारोह: राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की प्रस्तुतियों का मंचन।
  • अखिल भारतीय कवि सम्मेलन और मातृशक्ति कवयित्री सम्मेलन।
  • अंतर्राष्ट्रीय पौराणिक फिल्म महोत्सव: 25 से अधिक देशों की भागीदारी।

श्री शुक्ला ने बताया कि विक्रमोत्सव के दौरान विभिन्न सांस्कृतिक, सामाजिक और शैक्षिक गतिविधियाँ आयोजित की जाएँगी, जो भारतीय संस्कृति और इतिहास की गहरी समझ प्रदान करने के साथ-साथ सम्राट विक्रमादित्य की विरासत को पुनर्जीवित करेंगी।