केसली में भगवान विश्वकर्मा प्राकट्य उत्सव: श्रद्धा और उल्लास का अनूठा संगम केसली (सागर) — केसली नगर के MPEB परिसर के समीप स्थित विश्वकर्मा मंदिर में 'भगवान विश्वकर्मा प्राकट्य उत्सव' अत्यंत श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विश्वकर्मा समाज द्वारा भव्य हवन-पूजन, आरती और मिलन समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय नागरिकों और समाज बंधुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन का आयोजन सुबह से ही मंदिर परिसर में उत्सव का माहौल रहा। विद्वान पंडितों के सानिध्य में समाज के वरिष्ठ सदस्यों ने वेदी पर आहुतियां दीं और विश्व शांति व समृद्धि की कामना की। भगवान विश्वकर्मा, जिन्हें ब्रह्मांड का प्रथम इंजीनियर और वास्तुकार माना जाता है, उनका आकर्षक श्रृंगार किया गया। पूजन के पश्चात महाआरती हुई और श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया।
कौशल और ईमानदारी के प्रतीक भगवान विश्वकर्मा समारोह के दौरान आयोजित गोष्ठी में वक्ताओं ने भगवान विश्वकर्मा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि:
"भगवान विश्वकर्मा केवल एक समाज के आराध्य नहीं, बल्कि वे श्रम, कला, सृजन और तकनीकी दक्षता के वैश्विक प्रतीक हैं। आज के आधुनिक युग में भी उनकी इंजीनियरिंग और निर्माण के सिद्धांत प्रासंगिक हैं। उनके आदर्श हमें सिखाते हैं कि हमें अपने कार्यक्षेत्र में पूर्ण ईमानदारी और समर्पण के साथ योगदान देना चाहिए।"
प्रमुख जनों की उपस्थिति और गौरवमयी सहभागिता कार्यक्रम का सफल संचालन गोपाल विश्वकर्मा ने किया। इस धार्मिक आयोजन में विश्वकर्मा समाज और नगर के प्रबुद्ध जन उपस्थित रहे, जिनमें मुख्य रूप से शामिल थे:
लखन लाल विश्वकर्मा संजय विश्वकर्मा रामेश्वर विश्वकर्मा मुन्ना विश्वकर्मा अंकित विश्वकर्मा उमेश विश्वकर्मा अशोक विश्वकर्मा भगवान दास विश्वकर्मा रघुवीर विश्वकर्मा छुट्टन विश्वकर्मा परमानंद विश्वकर्मा छोटेलाल विश्वकर्मा सुगंधी लाल विश्वकर्मा कर्नल विश्वकर्मा राजेश विश्वकर्मा समस्त विश्वकर्मा समिति केसली कार्यक्रम में समाज की मातृशक्ति की भी विशेष उपस्थिति रही, जिन्होंने भजन-कीर्तन के माध्यम से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। कार्यक्रम के अंत में मिलन समारोह आयोजित हुआ, जिसमें समाज की एकता और भावी विकास योजनाओं पर चर्चा की गई। इसके बाद सभी ने प्रसाद ग्रहण किया।
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