“लाइसेंस की आड़ में शराब तस्करी का खेल?” — बरौली ग्रुप पर गंभीर आरोप, आबकारी और पुलिस की भूमिका सवालों में

त्योंथर/रीवा। त्योंथर तहसील के चंद्रपुर, चिल्ला और गढ़ी क्षेत्र में शराब कारोबार को लेकर हालात लगातार बिगड़ते नजर आ रहे हैं। आरोप है कि इन क्षेत्रों की लाइसेंसी शराब दुकानों का संचालन बरौली ग्रुप को मिलने के बाद अवैध शराब की सप्लाई गांव-गांव तक फैल गई है, जिससे कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि लाइसेंसी ठेकेदार राकेश कुमार मद्धेशिया के संरक्षण में शराब की खुलेआम तस्करी हो रही है। गांवों और टोले-टोले तक अवैध रूप से शराब पहुंचाई जा रही है, जबकि जिम्मेदार विभाग इस पर प्रभावी कार्रवाई करते नजर नहीं आ रहे।
सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि जिन लोगों पर पहले शराब तस्करी के मामले दर्ज हो चुके हैं और जिन पर पुलिस कार्रवाई कर चुकी है, वही अब फिर से सक्रिय होकर कथित तौर पर “सप्लायर” की भूमिका में दिखाई दे रहे हैं। इससे कानून के डर और प्रशासनिक कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।
बरहा, घटेहा, पटहट, भोथी, और सूती जैसे गांवों के लोगों का कहना है कि जहां एक ओर मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर अवैध शराब की उपलब्धता आसानी से हो रही है। आरोप है कि चंद्रपुर, गढ़ी और चिल्ला की लाइसेंसी दुकानों से बड़े पैमाने पर शराब निकालकर अवैध रूप से गांवों में खपाई जा रही है।
इस पूरे मामले में आबकारी विभाग और स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है। विशेष रूप से आबकारी इंस्पेक्टर गोकुल मेघवाल और संबंधित पुलिस अधिकारियों की भूमिका को लेकर क्षेत्र में चर्चा बनी हुई है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
ग्रामीणों में इस मुद्दे को लेकर आक्रोश बढ़ता जा रहा है। चंद्रपुर, चिल्ला, गढ़ी, बरहा, तुर्कगोदर, बारों, भोथीं, सहित कई गांवों के लोग विरोध प्रदर्शन की तैयारी में हैं। उनका कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन तेज किया जाएगा।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इन आरोपों को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होती है, या फिर मामला यूं ही ठंडे बस्ते में चला जाएगा।