आमला। रेलवे कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर सरकार ने जल्द सकारात्मक कदम नहीं उठाए तो रेलवे कर्मचारियों और सरकार के बीच संघर्ष होना तय है। यह चेतावनी ऑल इंडिया रेलवेमेन्स फेडरेशन (एआईआरएफ) के महामंत्री कॉमरेड शिव गोपाल मिश्रा ने दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि फेडरेशन संवाद के माध्यम से समस्याओं का समाधान चाहता है, लेकिन कर्मचारियों की मांगों की लगातार अनदेखी की गई तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा।

 

नेशनल रेलवे मजदूर यूनियन (एनआरएमयू) का मध्य रेलवे एवं कोंकण रेलवे का 72वां अधिवेशन 27 से 29 अक्टूबर तक पंढरपुर रेलवे स्टेशन परिसर में आयोजित किया जा रहा है। अधिवेशन में देशभर से लगभग 5 हजार रेलवे कर्मचारी शामिल हुए हैं।

 

*नागपुर मंडल से 600 से अधिक कर्मचारियों की सहभागिता*

 

अधिवेशन में सेंट्रल रेलवे के नागपुर मंडल से 600 से अधिक रेलकर्मियों ने भागीदारी की। कर्मचारियों की सुविधा के लिए नागपुर मंडल से पंढरपुर तक विशेष ट्रेन चलाई गई। इसमें नॉर्थ सेक्शन की विभिन्न शाखाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। विशेष रूप से आमला, जुन्नारदेव और बैतूल ब्रांच के सैकड़ों कर्मचारी अधिवेशन में पहुंचे और संगठन की एकजुटता का परिचय दिया।

 

*खाली पदों पर भर्ती सहित पांच प्रमुख मांगें*

 

एआईआरएफ महामंत्री शिव गोपाल मिश्रा ने रेलवे में ढाई लाख रिक्त पदों पर तत्काल भर्ती, आउटसोर्सिंग व्यवस्था बंद करने, सेवानिवृत्त कर्मचारियों को दोबारा ठेके पर रखने की प्रवृत्ति समाप्त करने, आठवें वेतन आयोग को जल्द लागू करने तथा कर्मचारियों के काम के घंटे निर्धारित कर अतिरिक्त कार्य का उचित भुगतान करने की मांग उठाई।

 

एनआरएमयू के महामंत्री वेणु पी. नायर ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में रेलवे में ट्रेनों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है, लेकिन कर्मचारियों की संख्या में लगातार कमी आई है। इससे कार्यरत कर्मचारियों पर काम का दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने वर्ष 1974 की ऐतिहासिक रेल हड़ताल का स्मरण कराते हुए कर्मचारियों से एकजुट और संगठित रहने का आह्वान किया।

 

अधिवेशन में रेलवे कर्मचारियों की समस्याओं और लंबित मांगों पर विस्तार से चर्चा की जा रही है। दिसंबर माह में विजयवाड़ा में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय अधिवेशन में आगामी आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी।