अशोकनगर में शस्त्र लाइसेंस में भेदभाव: प्रभावशाली लोगों को त्वरित अनुमोदन, किसान परेशान
अशोकनगर में शस्त्र लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठे हैं। आरोप हैं कि जहां प्रभावशाली परिवारों व प्रशासनिक अधिकारियों के परिजनों को लाइसेंस कुछ ही दिनों में मिल जाते हैं, वहीं गरीब किसान महीनों से कलेक्ट्रेट के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
- जिले में शस्त्र लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में भेदभाव का आरोप।
- प्रभावशाली परिवारों और अधिकारियों के परिजनों को 15 दिन में लाइसेंस।
- किसान और छोटे व्यापारी महीनों से लाइसेंस के इंतजार में।
- जंगली जानवरों और अपराधियों से सुरक्षा के लिए किसानों की मांग।
- दूर-दराज के गांवों से आए किसानों को कलेक्ट्रेट के चक्कर लगाने पर मजबूर किया जा रहा है।
महत्वपूर्ण निर्देश: यह सुनिश्चित किया जाए कि शस्त्र लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और समानता बनी रहे।
जिले के किसान और छोटे व्यापारी लाइसेंस की मांग कर रहे हैं ताकि वे अपनी फसल और जान-माल की सुरक्षा कर सकें। लेकिन उन्हें कलेक्ट्रेट की लंबी कतारों और अधूरी जानकारी का हवाला देकर लौटा दिया जाता है। इस स्थिति ने प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों के अनुसार, इस मुद्दे पर उच्च स्तर पर जांच की जा रही है।
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