कटनी जिले में कृषि और किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए खरीफ फसलों के लिए सर्वाधिक मांग वाली नीम कोटेड यूरिया और डीएपी की एक-एक रैक झुकेही रैक प्वाइंट पर पहुँच चुकी है। कलेक्टर श्री आशीष तिवारी द्वारा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ निरंतर संवाद और सार्थक प्रयासों के परिणामस्वरूप जिले को यह बड़ी मात्रा में खाद प्राप्त हुई है। इस रैक के पहुँचने से जिले को कुल 590 मीट्रिक टन यूरिया और 760 मीट्रिक टन डीएपी खाद की प्राप्ति हुई है, जिससे स्थानीय किसानों की खाद की आवश्यकता को समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी।

उर्वरकों का डबल लॉक केन्द्रवार आवंटन

जिला विपणन अधिकारी श्री आनंद नारायण पांडेय ने जानकारी देते हुए बताया कि झुकेही रैक प्वाइंट पर उतारी जा रही डीएपी और यूरिया खाद का पारदर्शी तरीके से विभिन्न डबल लॉक केंद्रों और संस्थाओं के लिए आवंटन तय कर दिया गया है ताकि सभी क्षेत्रों के किसानों को सुगमता से खाद मिल सके।

  • डीएपी खाद का वितरण: प्राप्त डीएपी में से कटनी डबल लॉक केंद्र और मझगवां-बड़वारा डबल लॉक केंद्र को 150-150 मीट्रिक टन डीएपी आवंटित की गई है। इसके अलावा, बहोरीबंद और स्लीमनाबाद डबल लॉक केंद्रों को 90-90 मीट्रिक टन तथा बरही डबल लॉक केंद्र को 70 मीट्रिक टन डीएपी दी गई है। साथ ही, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक कटनी को 150 मीट्रिक टन और एमपी एग्रो कटनी को 60 मीट्रिक टन डीएपी आवंटित की गई है।

  • यूरिया खाद का वितरण: यूरिया के आवंटन के तहत कटनी, बहोरीबंद और मझगवां-बड़वारा डबल लॉक केंद्रों को 90-90 मीट्रिक टन यूरिया दी गई है। वहीं, स्लीमनाबाद डबल लॉक केंद्र को 65 मीट्रिक टन, बरही डबल लॉक केंद्र को 75 मीट्रिक टन, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक कटनी को 120 मीट्रिक टन और एमपी एग्रो कटनी को 60 मीट्रिक टन यूरिया आवंटित की गई है।

कृषि विभाग की सलाह और तकनीकी पहल

कृषि विभाग ने जिले के सभी अन्नदाताओं से विशेष अपील की है कि वे अपनी भूमि के स्वास्थ्य को सर्वोपरि रखते हुए संतुलित मात्रा में ही उर्वरकों का उपयोग करें। विशेषज्ञों का मानना है कि आवश्यकता से अधिक खाद का प्रयोग करने से न केवल कृषि की लागत बढ़ती है, बल्कि भूमि की प्राकृतिक उर्वरक क्षमता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए किसानों को जरूरत के हिसाब से ही उर्वरक का उठाव करना चाहिए।

व्हाट्सएप बॉट से डिजिटल टोकन की सुविधा

उर्वरक वितरण व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी, सुगम और सुविधाजनक बनाने के लिए प्रशासन द्वारा तकनीक का बेहतरीन उपयोग किया जा रहा है।

  • ई-विकास 2.0 पहल: किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मोबाइल पर व्हाट्सएप बॉट के माध्यम से आसानी से टोकन जनरेट करने की अनूठी सुविधा शुरू की गई है।

  • आसान प्रक्रिया: किसान अपने व्हाट्सएप पर केवल “हेल्प” या “मदद” लिखकर संदेश भेजकर टोकन, नजदीकी रिटेलर, उपलब्ध उर्वरक, उठाव की तिथि और टोकन की वैधता से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारियां घर बैठे प्राप्त कर सकते हैं।

  • पारदर्शिता और समय की बचत: तकनीक पर आधारित इस उन्नत पहल से खाद वितरण प्रणाली में पूर्ण पारदर्शिता आएगी और किसानों को लंबी कतारों से मुक्ति मिलने के साथ-साथ समय पर खाद की प्राप्ति सुनिश्चित होगी। कलेक्टर श्री तिवारी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि ई-टोकन प्रणाली का कड़ाई से पालन कराते हुए ही किसानों को खाद का वितरण किया जाए, ताकि हर पात्र किसान को उसका पूरा हक मिल सके।

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