ANCHOR - रेलवे स्टेशनों की सफाई पर करोड़ो खर्च होते हैं इसके बावजूद यात्रियों को कचरे और बदबू के बीच बैठना पड़ रहा है । बैतूल रेलवे स्टेशन इसी एक बानगी बना हुआ है जहां स्टेशन को आईएसओ सर्टिफिकेट मिला हुआ है लेकिन सफाई ठेकेदार की लापरवाही के चलते स्टेशन का कोना कोना कूड़ादान बना हुआ है । यात्री इसी गंदगी के बीच बैठते सोते हैं । अमृत भारत स्टेशनों में शामिल बैतूल स्टेशन की इस दुर्दशा को लेकर रेलवे प्रबंधन भी लापरवाह बना हुआ है । 

 

 

V.o.1.- ये है बैतूल का अमृत भारत स्टेशन जिसे कुछ वर्ष पहले सफाई और मैनेजमेंट के लिए आईएसओ प्रमाणपत्र मिला था लेकिन आज स्टेशन की हालत किसी कचराघर जैसी दिखाई दे रही है । जगह जगह सड़ता हुआ खाद्य पदार्थ , और कई क्विंटल प्लास्टिक कचरा । बदबू और गंदगी के चलते स्टेशन पर बैठना भी मुश्किल हो रहा है । 

 

Byte.1.इंडी अहलूवालिया

              स्थानीय निवासी

 

Byte.2.पिंकी भाटिया

               रेल यात्री

 

V.o.2.- रेलवे स्टेशन पर सफाई का ठेका करोड़ो में होता है । सफाई का ठेका लेने वाले कॉन्ट्रेक्टर की जिम्मेदारी है कि रेलवे स्टेशन और ट्रैक के आसपास दिन में दो बार सफाई करवाई जाए लेकिन ठेकेदार कर्मचारियों की कमी का बहाना बनाकर जिम्मेदारी से बच रहे हैं जिससे हालात दिनोदिन बदतर होते जा रहे हैं । 

 

Byte.3.संतोष यादव

               सफाई कॉन्ट्रेक्टर ,बैतूल रेलवे स्टेशन

 

V.o.3.- भारत के सरकार हर साल रेलवे को स्वच्छ, सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए पर्याप्त बजट और सुविधाएं मुहैया करवा रही हैं लेकिन जमीनी स्तर पर कॉन्ट्रेक्टर और स्टेशन प्रबंधन की मिलीभगत के चलते आईएसओ प्रमाणित रेलवे स्टेशन भी गंदगी का अड्डा बन हुए ह