गुना जनसुनवाई में भेदभाव पर भड़की जनता: VIP के लिए रेड कार्पेट, आम जनता के लिए 'नो एंट्री'

गुना (मध्य प्रदेश): जिला मुख्यालय पर आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई में मंगलवार को आम जनता के साथ हुए भेदभावपूर्ण व्यवहार ने विवाद की स्थिति पैदा कर दी। दूर-दराज से अपनी समस्याएं लेकर आए ग्रामीणों को घंटों बाहर खड़ा रखा गया, जबकि रसूखदारों और VIP लोगों को सीधे अंदर प्रवेश दिया गया। इस अनुचित व्यवहार से जनता में आक्रोश फैल गया और हंगामे की स्थिति बन गई।

आम आदमी के लिए इंतजार, रसूखदारों की 'डायरेक्ट एंट्री'

जनसुनवाई का उद्देश्य आम नागरिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान करना है, लेकिन आज का दृश्य इसके विपरीत था। पीड़ितों का आरोप है कि:

  • कड़ा पहरा: मुख्य द्वार पर तैनात सुरक्षाकर्मियों और कर्मचारियों ने आम जनता को बाहर ही रोक दिया।
  • VIP कल्चर का बोलबाला: जहां गरीब और परेशान लोग अपनी अर्जी लेकर धूप में खड़े रहे, वहीं "पहुंच वाले" लोग बिना किसी रोक-टोक के अधिकारियों के चैंबर तक पहुंचे।
  • अधिकारियों की बेरुखी: घंटों इंतजार के बाद भी जब लोगों को अंदर नहीं जाने दिया गया, तो परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल

मौके पर मौजूद लोगों ने सवाल उठाया कि यदि जनसुनवाई में भी आम आदमी को अपनी बात रखने के लिए संघर्ष करना पड़े, तो इस प्रक्रिया का मतलब क्या रह जाता है? कई बुजुर्ग और महिलाएं जो मीलों दूर से न्याय की उम्मीद में आए थे, उन्हें इस व्यवस्था ने निराश किया।

जनता की मांग: समान अधिकार की गारंटी

हंगामे के दौरान जनता ने समान व्यवहार की मांग की। उन्होंने सुझाव दिया कि जनसुनवाई में आने वाले हर व्यक्ति को "टोकन सिस्टम" या "पहले आओ-पहले पाओ" के आधार पर ही प्रवेश दिया जाना चाहिए, न कि किसी के रसूख या पद को देखकर।

जनता का यह आक्रोश प्रशासन के लिए एक चेतावनी है कि उन्हें अपनी प्रक्रिया में पारदर्शिता लानी होगी, ताकि जनसुनवाई का मूल उद्देश्य पूरा हो सके और हर नागरिक को समानता का अधिकार मिल सके।