पति ने किडनी दान कर बचाई पत्नी की जान: कृषक अरविंद पटेल ने पेश की प्रेम और साहस की मिसाल
आज के समय में जहाँ रिश्तों में छोटी-छोटी बातों पर दरार आ जाती है, वहीं मध्य प्रदेश के एक किसान ने अपनी पत्नी के प्रति अटूट प्रेम और कर्तव्य की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने मानवता का सिर गर्व से ऊँचा कर दिया है।
शादी और सुखी परिवार
मूल रूप से ग्राम निसरपुर तहसील कुक्षी जिला धार के निवासी है जो कि हाल मुकाम ग्राम रिचफल तहसील पुनासा जिला खंडवा में निवासरत है जहां वह अपने परिवार के साथ रहते हैं वह अपना जीवन यापन खेती कर अपना व अपने परिवार का भरण पोषण करते आ रहे हैं अरविंद सिंह पटेल जो कि स्व. हरेसिंह पटेल एक शिक्षक के पुत्र हैं उनका विवाह वर्ष 2001 में किरण बाई के साथ हुआ था। विवाह के समय अरविंद जी की उम्र 23 वर्ष थी। उनके परिवार में दो बेटे हैं—बड़े बेटे नाम आयुष पटेल (उम्र 21 वर्ष) और छोटे बेटे का नाम पीयूष पटेल (उम्र 17 वर्ष)। अरविंद जी पेशे से एक कृषक हैं और मेहनत से अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे।
परिवार बीमारी का पहाड़ और संघर्ष==
पिछले छह वर्षों से अरविंद जी का परिवार एक कठिन दौर से गुजर रहा था। किरण बाई लंबे समय से बीमार चल रही थीं। बेहतर इलाज के लिए पति अरविंद पटेल उन्हें इंदौर, नडियाद और अहमदाबाद जैसे बड़े शहरों के चक्कर काटते रहे। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था; समय ने उन्हें एक ऐसी परिस्थिति खड़ा कर दिया जहां उन्हें उम्मीद की कोई किरण नहीं जलते दिखाई दे रही थी अपने जीवन साथी को बचाने के लिए वह लगातार संघर्ष करते रहे जहां वह अपने जीवन साथी की लंबी बीमारी के कारण किरण बाई की दोनों किडनियाँ खराब हो गई थीं।
जीवनदान का फैसला===
एक तरफ दो जवान बेटों की पढ़ाई और उनके भविष्य की चिंता थी, तो दूसरी तरफ पत्नी की जानलेवा बीमारी। ऐसी गंभीर परिस्थिति में अरविंद ने हिम्मत नहीं हारी। और अपनी पत्नी का जीवन बचाने के लिए उन्होंने एक बड़ा फैसला लिया। एक कृषक होने के नाते आर्थिक तंगी और शारीरिक जोखिम के बावजूद, अरविंद जी ने अपनी एक किडनी अपनी पत्नी को दान कर दी और उन्हें मौत के मुँह से बाहर निकाल लाए।
समाज के लिए प्रेरणा==
आज अरविंद पटेल और किरण बाई दोनों स्वस्थ हैं। अरविंद ने ,न केवल अपने बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी निभाई, बल्कि अपने साहस और त्याग से अपने बिखरते परिवार को फिर से जोड़ लिया। उनका यह कदम उन सभी लोगों के लिए एक सीख है जो मुश्किल घड़ी में अपनों का साथ छोड़ देते हैं।
किरण बाई कहती हैं, "उन्होंने मुझे सिर्फ किडनी ही नहीं, बल्कि एक नया जीवन दिया है।" अरविंद पटेल का यह निस्वार्थ प्रेम आज पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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