कागजी खानापूर्ति : आंगनवाड़ी से एनआरसी तक करोड़ों खर्च, पर मासूमों को नहीं मिल रही राहत अफसरों की नहीं टूटी नींद : 2900 बच्चे अति कुपोषित, फिर भी 50% से अधिक खाली पड़े एनआरसी के बेड

बड़वानी-जिले में कुपोषण के खिलाफ छिड़ी जंग केवल फाइलों और नारों तक सीमित नजर आ रही है। जमीनी हकीकत यह है कि जिले में 2900 से अधिक मासूम बच्चे अति कुपोषण की श्रेणी में हैं, लेकिन उन्हें जीवनदान देने वाले पोषण पुनर्वास केंद्र खाली पड़े हैं। जिला अस्पताल सहित जिले के 6 केंद्रों में कुल 70 बेड उपलब्ध है, जिनमें से 50 प्रतिशत से अधिक खाली है। शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद अधिकारियों और पर्यवेक्षकों की लापरवाही मासूमों की सेहत पर भारी पड़ रही है। हैरानी की बात यह है कि जब सरकार पोषण माह जैसा कोई विशेष अभियान चलाती है, तो विभाग सक्रियता दिखाता है और केंद्रों में क्षमता से अधिक बच्चे नजर आते हैं, लेकिन अभियान खत्म होते ही जिम्मेदार अफसर और मैदानी अमला मानों कुंभकर्णी नींद सो जाता है। जिले के पाटी, राजपुर, सेंधवा, निवाली और पानसेमल जैसे ब्लॉक, जहां कुपोषण का ग्राफ हमेशा ऊंचा रहता है, वहां भी एनआरसी में बेड खाली पड़े होना विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। नर्सों का कहना है कि महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से बच्चों
को रेफर और भर्ती नहीं कराया जा रहा है।

*बड़वानी। एनआरसी में केवल 40 प्रतिशत बेड भरे हुए है।*

*जिले के केंद्रों की वर्तमान स्थिति*

केंद्र  - बड़वानी
बेड क्षमता-20
भर्ती बच्चे-08
खाली बेड-12

केंद्र-पाटी
बेड क्षमता-10
भर्ती बच्चे-08
खाली बेड-02

केंद्र-पानसेमल
बेड क्षमता-10
भर्ती बच्चे-08
खाली बेड-02

केंद्र-सेंधवा
बेड क्षमता-10
भर्ती बच्चे-04
खाली बेड06

केंद्र-राजपुर
बेड क्षमता-20
भर्ती बच्चे-01
खाली बेड 09

कुल केंद्र-70
कुल भर्ती बच्चें-33
कुल खाली बेड-37

*बजट का खेल और मीनू में कटौती*

एनआरसी केंद्रों में भर्ती बच्चों को विशेष पोषण आहार देने के दावे तो बहुत किए जाते हैं, लेकिन सच्चाई इसके उलट है। दरअसल, इन केंद्रों को आहार और अन्य सुविधाओं के लिए बजट बेड की संख्या के आधार पर आवंटित होता है। जब भर्ती बच्चों की संख्या कम होती है, तो संसाधनों की कमी का बहाना बनाकर निर्धारित मीनू का पालन भी नहीं किया जाता। सुविधाओं के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है, जिससे बच्चों को लाभ नहीं मिल पा रहा है।

*राजपुर और सेंधवा के हालात सबसे बदतर*

जिले में राजपुर ब्लॉक की स्थिति सबसे चिंताजनक है, जहां 10 बेड की क्षमता वाले केंद्र में मात्र 1 बच्चा भर्ती है। वहीं सेंधवा और निवाली में भी स्थिति संतोषजनक नहीं है। जिले में कुपोषित बच्चों की संख्या 2900 के पार गई है। तुलनात्मक रूप से पाटी और पानसेमल ब्लॉक बच्चों को भर्ती करने में अन्य की तुलना में बेहतर पायदान पर हैं, लेकिन जिला मुख्यालय स्थित अस्पताल में ही मार्च के महीने में सन्नाटा पसरा हुआ है।

*निर्देश जारी किए हैं*
रतनसिंह गुंडिया, जिला कार्यक्रम अधिकारी बड़वानी
कुपोषण दूर करना स्वास्थ्य और महिला बाल विकास विभाग, दोनों की जिम्मेदारी है। इस वर्ष अब तक 1800 से 1900 बच्चे भर्ती होकर स्वस्थ हुए हैं। जिले में अति कुपोषित बच्चों की संख्या 2900 है। संबंधित सेक्टर के पर्यवेक्षकों को निर्देश दिए हैं कि वे आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से कम वजन वाले व क्रिटिकल बच्चों को चिह्नित कर एनआरसी में भर्ती कराएं।