म.प्र. बिजली कर्मचारी महासंघ का प्रदेश व्यापी आंदोलन
भारतीय मजदूर संघ एवं अखिल भारतीय विद्युत मजदूर महासंघ से संबंध के बैनर तले मांगों को लेकर दिया अधीक्षक यंत्री कार्यालय के बाहर धरना।

बड़वानी:-भारतीय मजदूर संघ और अखिल भारतीय विद्युत मजदूर महासंघ से संबद्ध मध्य प्रदेश बिजली कर्मचारी महासंघ ने संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण, वेतन विसंगति सहित 11 सूत्रीय लंबित मांगों के लिए प्रदेशव्यापी आंदोलन का शंखनाद किया है 
जिलों में स्थानीय तौर ज्ञापन धरना और प्रदर्शन के बाद "भोपाल चलो" आंदोलन के तहत राजधानी भोपाल में सरकार पर दबाव बनाए जाने के मकसद से धरना प्रदर्शन किया जाएगा । इस दौरान जिला मुख्यालय के नवलपुरा स्थित अधीक्षण यंत्री कार्यलय विभाग के बाहर बैठे संविदा कर्मियों ने काम बन्द कर हड़ताल पर  मांगों पूरा करवाने के एवेज में सरकार तक पहुंचाने के लिए एक दिवसीय काम बन्द कर हड़ताल पर उतर आए है जिसके 11 प्रमुख मांगों को लेकर चलते चरणबद्ध आंदोलन किया जा रहा है जिसमें संविदा आउटसोर्सिंग नियमिति करण की समस्या को प्रमुखता से उठाया गया है। महासंघ के अनुसार लम्बे समय से मांगो के निराकरण नही होने से कर्मचारियों में आक्रोश है इसी के चलते प्रदेश व्यापी आंदोलन को रूप रेखा बनाई गई है इस दौरान आज दो अप्रैल को धरना प्रदर्शन आंदोलन के तीसरे चरण के तहत दो अप्रैल को जिला एवम कंपनी स्तर पर एक दिवसीय धरना प्रर्दशन किया गया वही आगामी 16 अप्रैल को राजधानी भोपाल में विशाल प्रर्दशन आयोजित किया जाएगा इस दौरान म.प्र बिजली विभाग कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष सयुंक्त महामंत्री मोहम्मद सादिक शेख ने बताया कि यह हमारा आंदोलन पांच चरणों के अंतर्गत चल रहा है पूर्व में दो चरण हो चुके है वही तीसरे चरण में आज जिला मुख्यालय के अधीक्षण यंत्री कार्यलय के बाहर धरना दिया जा रहा है वही  शेख ने कहा कि हमारी प्रमुख मांगे यह है कि जो आउटसोर्स कर्मचारी (संविदा कर्मचारी) विगत 15 वर्षों से काम कर रहा है जिन्हें आज तक नियमित नही किया गया और नही उन्हें शासन की लाभ प्रद योजना से लाभान्वित किया गया वही आउटसोर्स कर्मी आज कंपनी की रीढ़ की हड्डी हो गई हैउन्ही की मौजूदगी में यह कार्य हो रहे हैलेकिन उनकी मांगों को लेकर कोई ध्यान नही है इसलिए धरना आंदोलन कर मांगो की ओर ध्यान आकर्षित के लिए यह आंदोलन किया जा रहा है वही इन कर्मियों को वेतन दिया जाए जिससे इनकी आर्थिक व दैनिक स्थिति ठीक तरह से चल सके। हालांकि धरने पर बेटे कर्मियों के चलते काम तो प्रवाहित होता लेकिन जनता का भी ध्यान में रखते हुए धरने पर  उन कर्मियों की छुट्टी है उन्हें इस धरने में शामिल किया गया  वही जिले भर में 800 संविदा कर्मचारी है जिन्हें आउटसोर्स में कलेक्टर दर से वेतन दिया जाता है वही कंपनी ने निजी कंपनी के हाथों में ठेका सौंप दिया है जिस कारण से आउटसोर्स संविदा कर्मियों को सुविधा नहीं मिल पा रही है