अखण्ड यादव टीकमगढ़ बल्देवगढ़। जनपद पंचायत बल्देवगढ़ अंतर्गत ग्राम पंचायत मझगुवां में विकास कार्यों के नाम पर बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े का सनसनीखेज मामला सामने आया है। मझगुवां से सरकनपुर मार्ग पर स्वीकृत पुलिया निर्माण कार्य में सरपंच एवं सचिव द्वारा बिना निर्माण कराए ही पूरी राशि आहरित कर ली गई। हैरानी की बात यह है कि लाखों रुपए के भुगतान के बावजूद मौके पर आज तक एक ईंट तक नहीं रखी गई, जिससे पूरे मामले में खुला भ्रष्टाचार और सुनियोजित फर्जीवाड़ा साफ नजर आ रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2025 में पांचवें राज्य वित्त आयोग योजना के तहत 6 लाख 1 हजार रुपए की लागत से पुलिया निर्माण कार्य स्वीकृत किया गया था। लेकिन इस कार्य में नियमों को ताक पर रखकर भारी भ्रष्टाचार किया गया। आरोप है कि 5 अगस्त 2025 को दो अलग-अलग फर्जी बिल लगाकर राशि आहरित कर ली गई, जिसमें पहला बिल 2 लाख 63 हजार रुपए और दूसरा बिल 2 लाख 46 हजार 500 रुपए का प्रस्तुत किया गया। यह भुगतान रतनगढ़ कंस्ट्रक्शन कंपनी के मालिक रविंद्र प्रताप सिंह बुंदेला, निवासी मझगुवां, के नाम किया गया।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस कंपनी के नाम से लाखों रुपए का भुगतान किया गया, उसका ग्राम पंचायत में कोई वास्तविक अस्तित्व नहीं बताया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह पूरा मामला फर्जी बिल, फर्जी दस्तावेज और मिलीभगत से किए गए भ्रष्टाचार का बड़ा उदाहरण है, जिसमें सरकारी राशि को ठिकाने लगाने के लिए कागजों में ही निर्माण कार्य पूरा दिखा दिया गया।

8 माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी मौके पर निर्माण कार्य शून्य है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह पूरा मामला सुनियोजित भ्रष्टाचार और संगठित फर्जीवाड़े का है। ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि योजनाबद्ध तरीके से सरकारी धन का दुरुपयोग और हेराफेरी की गई है।

मामले में एक और गंभीर आरोप सामने आया है कि ग्राम पंचायत में वास्तविक सरपंच की भूमिका नगण्य है और पंचायत संचालन पर गांव के कुछ दबंग लोगों का कब्जा है। आरोप है कि रतनगढ़ कंस्ट्रक्शन कंपनी के संचालक रविंद्र प्रताप सिंह बुंदेला द्वारा ही पंचायत के कार्यों को नियंत्रित किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि वास्तविक सरपंच को आज तक किसी बैठक में सक्रिय रूप से नहीं देखा गया, जिससे यह आशंका और मजबूत हो जाती है कि पूरी सरपंची किसी और के इशारे पर चलाई जा रही है।

ग्रामीणों ने इसे खुला भ्रष्टाचार, फर्जीवाड़ा और प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर मामला बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस तरह के भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो शासन की योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएंगी और जमीनी स्तर पर विकास कार्य पूरी तरह ठप हो जाएंगे।

इस संबंध में जनपद पंचायत के सीईओ निशांत भूरिया ने कहा कि बिना निर्माण कार्य कराए राशि आहरित किए जाने की शिकायत उनके संज्ञान में आई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच कराई जाएगी और यदि भ्रष्टाचार एवं फर्जीवाड़ा पाया जाता है तो संबंधित दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यदि सरपंची किसी अन्य व्यक्ति द्वारा संचालित किए जाने की पुष्टि होती है, तो उस पहलू की भी विस्तृत जांच कराई जाएगी।

मामले के उजागर होने के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया है और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस स्पष्ट भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े के मामले में कितनी निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई करता है, या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह जांच के नाम पर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।