खकनार
ज्ञात हो कि बीते ४ वर्षों से पांगरी बांध परियोजना से प्रभावित किसानों ने ४ गुना मुआवजे कि लड़ाई न केवल अपने लिए बल्कि संपूर्ण प्रदेश के किसानों के लिए लड़ी और जीती हासिल की पिछले ४ वर्षों में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री से लेकर मानवाधिकार आयोग एवं विभिन्न मंत्रालयों में अपनी बात बड़ी शिद्दत से रखते हुए केन्द्र सरकार के भुमि अधिग्रहण कानून में विशेष रूप से उल्लेखित मुआवजा किसी भी स्थिति में ४ गुना से कम नहीं के अपने अधिकार पर डटे रहे और आज परिणाम सबके सामने है। यह पुरा आंदोलन अपने आप में अद्वितीय एवं अद्भुत था न किसी अधिकारी को न सरकार को बिना भला बुरा कहें केवल और केवल कानूनन अपने अधिकार को प्रशंसनीय सत्याग्रह द्वारा संचालित कर किसानों ने देश भर के किसानों का पथ प्रदर्शन किया है। बिना यातायात को प्रभावित करें एवं बिना सरकारी संपत्ति को नुक्सान पहुंचाये, विभिन्न प्रतिकात्मक आंदोलन किए, जिसमें शीर्षासन आंदोलन,पत्थर खाओ आंदोलन,मुंह काला आंदोलन, मुर्गा बनो आंदोलन, धृतराष्ट्र आंदोलन, जादू टोना आंदोलन, भैंस के आगे बीन बजाओ आंदोलन, वृक्षासन आंदोलन, आदि मानव आंदोलन, अर्धनग्न आंदोलन,अर्ध जलमग्न आंदोलन, सिर पर खेती आंदोलन, अन्याय कि हांडी फोड़ आंदोलन , विवेक बुद्धि यज्ञ आंदोलन, कोलाहल आंदोलन, बच्चों द्वारा कलम पट्टी आंदोलन, आदि अन्य आंदोलन से संपूर्ण प्रदेश को उद्वेलित कर दिया था परीणाम स्वरूप पुरे प्रदेश का हित हुआ है,१० लाख प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर आज ३० प्रति हेक्टेयर हुआ है, किसानों कि अगुवाई कर रहे डॉ रवि कुमार पटेल ने कहा कि" हमें यकीन था और यह हुआ, अब विकास में मध्य प्रदेश देश में सर्वोपरि होगा " सभी किसानों ने जिलाधिकारी महोदय श्री संजय सिंह जी का आभार माना साथ ही किसानों का नेतृत्व कर रहे डॉ रविकुमार पटेल कि भी मुक्त कंठ से प्रशंसा की कहा आज न केवल हमें न्याय मिला वरन् प्रदेश भर के किसानों को सम्मान मिला है इस सभा में हर्षोल्लास के साथ किसानों ने 'जय जवान जय किसान' के नारे लगाए एवं बांध के करीब स्थित शिव मंदिर में पूजा अर्चना की इस पुरे आंदोलन कि रिढ कि हड्डी रहें असाधारण एवं महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वालों में प्रमुखता से नंदू पटेल, मान्या भिलावेकर, संजय चौकसे, राहुल राठोड़, मंसाराम,रामदास महाराज,माधो नाटो, बद्री वास्कले,श्रीराम ,सालिकराम,मामराज राजूभाई, नीतेश श्राफ, निखिलेश वाणी, विज्जु चौकसे ,कालू चौकसे, श्रीकिशन, पन्ना पटेल, शुमला शालिग्राम, देवा डॉ सुशील पटेल, डॉ नीरज पटेल, ओमप्रकाश, विजय, नवल भाई,मनोज , सालिकराम,आदि अन्य किसान मौजूद रहे।

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