खकनार
श्री राम नवमी एवम नव वर्ष के शुभ अवसर पर प्रति वर्षानुसार इस वर्ष भी श्री राम नगरी जामुनिया में श्री संगीतमय  श्रीमद भागवत कथा व हरिनाम संकीर्तन  का आयोजन किया जा रहा है  कथा वाचक प,पु,श्री  सुशील चोरे जी महाराज ब्रह्मपुर के मुखारविंद से  कथा के तीसरे दिन  कहा कि राजा परीक्षित व सुखदेव महाराज का वर्णन करते हुए कहा कि हमारे जीवन में थोड़ी सी भी चुप हो गई तो हमें न का भोगना पड़ता है इसलिए भागवत कथा सिखाती है अच्छे कर्म करो किसी का पैसा लिया है तो लौटा दो चोरी मत करो धर्म के मार्ग पर चलो चोरी किया गया पैसा ज्यादा दिन नहीं टिकता अभी गर्मी के दिन चल रहे हैं पक्षियों को पानी पिलाना बहुत  बड़ा धर्म का काम है पहले लोग गाय पालते थे गाय के पैरों से धूल उड़ाती थी तो उस धूल से सभी रोग खत्म हो जाते थे गाय के गोबर से  घर द्वार लिपे जाते थे वह गोबर से पूरे रोग खत्म हो जाते थे पहले लोग  गया माता को घूमाने ले जाते थे  पर अब कुत्तो का गोद मे उठाकर घुमाने ले जाते है  और बहार लिखते है कुत्तो से सावधान  कुत्ता ऐसा प्राणी है उसे यम दिखाई देता  है  उसको पाला है तो अपने घर के बाहर रखे घर मे बिस्तर पर ना सुलाए  कलयुग के चार चरण है सत्य, पवित्रता , दया ,व  दान सिर्फ एक चरण पर धर्म टिका हुआ है वह धर्म है दान जब भी कोई धार्मिक कार्यक्रम हो दान जरूर देना चाहिए योग्य वस्तु का  ही दान  देना चाहिए जो धन किसी से छीन हो वह धन कलयुग का निवास होता है वह धन जो मेहनत से कमाया हो वह धन सत्य धन है आज कलयुग के भक्तों को ज्ञान की बातें सुनने में बड़ी कठिनाई होती है दोनों आंखों से दिखाना बंद हो जाता है मुख से दांत गिरने लगे बोलने में परेशानी आने लगे तब समझ लेना मृत्यु पास आने लगी है मरते समय मुख से कभी भी राम नहीं निकलता क्योंकि यमराज करने वाले का गला पकड़ लेता है उसकी बोलती बंद हो जाती है इसलिए भगवान की भक्ति करनी चाहिए कभी भी अच्छे व्यक्ति का ही संग करो बुरे व्यक्ति का त्याग करो भगवान ने मनुष्य कोई भी हो जाती बंधन का त्याग करना चाहिए जो हरि का है वही हरिका है हर कोई व्यक्ति की उत्पत्ति भगवान से ही हुई है आज कल लोग जाती वाद पर उतारू हो जाते  कोई जाति छोटी बड़ी नहीं होती जो सनातनी को मानने वाला है वह सनातनी है जब राम जी को वनवास हुआ तो वनवासी  6 महीने से नहाये नहीं थे फिर भी श्री राम भगवान ने उनको दर्शन दिए भगवान जाति में भेदभाव नहीं रखते अंत मे भगवान शिव का विवाह पूरी रीति रिवाज व मंत्रो उच्चार के साथ हुआ