सीजन में पहली बार आवक 1800 बोरी पार, बेमौसम वर्षा ने फीकी की सौंफ की चमक
गत सप्ताह से 20 हजार रुपए अधिक मिले भाव, अधिकांश उपज के मिले कम दाम।
मंडी प्रशासन की व्यवस्था पर उठे सवालिया निशान मंडी परिसर की खुली छत के नीचे कटी किसानों की रात। पेयजल सहित शौचालय व्यवस्था चरमराई । बेतरतीब वाहनों की पार्किंग ने बढ़ाई मंडी प्रशासन की चिंता ,आने जाने वाहनों का लगा जमावड़ा यातायात हुँआ बाधित।
बड़वानी :-इस रविवार शहर स्थित कृषि उपज मंडी में सौंफ की सीजन में बंपर आवक रही। जिससे सौंफ की आवक 1800 बोरी से अधिक रही। हालांकि विगत दिन हुई तेज हवा आंधी, बेमौसम वर्षा और ओलावृष्टि से सौंफ फसल पर काफी प्रभाव पड़ा जिससे सौफ अधिंकाश प्रभावित्त हुई हैं। जिससे अधिकांश सौंफ की रंगत कम होकर क्वालिटी कमजोर नजर आई।हॉलाकि सौंफ का अधिक भाव गत सप्ताह से 20 हजार रुपए अधिक रहा, लेकिन कमजोर क्वालिटी की सौंफ 62 से 200 रुपए किलो के बीच ही बिकी।
मंडी प्रशासन के अनुसार इस सप्ताह सौंफ की आवक रिकार्ड1865 बोरी में अनुमानित वजन 1हजार क्विंटल से अधिक रही। बारीक सौंफ का भाव 20हजार रुपए, तो मोटी सौंफ 6 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक बिकी। दरअसल गत फरवरी माह से प्रति रविवार सौंफ की आवक में बढ़ोतरी हो रही हैं। सौंफ
व्यापारी ने कहा कि इस माह के प्रारंभ से तेज धूप के चलते सौंफ उपज सूखकर बेहतर क्वालिटी की आ रही थी, लेकिन गत दिनों के मौसम बदलाव ने फिर सौंफ की
उपज पर प्रभाव डाल दिया। इससे सौंफ के रंग में अंतर आने लगा हैं। वही सौफ 160 से लेकर 200 रुपए प्रति किलों के मान से भाव कृषकों को दिया गया वही मोटी सौफ 110 से लेकर 120 रुपए तक के दाम रहे वही बहेतर क्वालिटी वाली सौफ 160 से 200 के बीच रहा वही व्यापारी का कहना है कि गत वर्ष की आने वाली सौफ में समय का अंतर हुआ है जो सौफ मार्च के पूर्व मंडी खरीदी बिक्री के लिए पहुंच जानी थी वह अब आ रही है ऐसे में समय का जरूर अंतर आया है हॉलाकि मंडी में 2 से 3हजार किसान व 150 से अधिक व्यापारी अलग अलग जिलों से आकर यहाँ सौफ की खरीदी बिक्री करते है इस दौरान व्यापारी ने बताया कि वे यहां से सौंफ खरीदकर गुजरात के गुन्जा क्षेत्र में भेजते हैं। वहां फैक्ट्री में सौंफ की सफाई व क्लिनिंग होकर देश प्रदेश में एक्सपोर्ट होती हैं। वर्तमान में आ रही सौंफ में प्रति क्विंटल 3 किलो से अधिक वेस्ट सामग्री निकल रही हैं।हालफिलहाल सौफ के दाम में इजाफा तब देखने को मिल सकता है आगे एक्सपोर्ट को लाइन खुल जाती है तो संभवतः भाव में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
*रविवार को सौंफ मंडी परिसर में सौंफ के ढेर नजर आए* ।
प्रति सप्ताह लगने वाली मंडी में सौफ की बंपर आवक होने से चारों तरफ सौफ का ढेर नजर आया तो वही बेतरतीब वाहनों की पार्किंग से मंडी में यातायात व्यवस्था चरमराती हुई नजर आई जिससे पार्किंग व्यवस्था अस्त व्यस्त नजर आने से वाहनों का जमावड़ा लगा रहा और आने जाने वाले वाहनों को निकलने में खासी दिक्कतो का सामना करना पड़ा जिसपर मंडी प्रशासन की व्यवस्था व मॉनिटरिंग पर भी इस तरह की व्यवस्था सवाल खड़ी करती नजर आई
*आवक हुई कमजोर गंधवानी मंडी से बड़वानी में*
जानकारी के अनुसार बड़वानी कृषि उपज मंडी में अधिकांश किसान समीप धार जिले से उपज बेचने आते हैं। वहीं बीते कुछ वर्ष से समीप धार जिले की गंधवानी कृषि मंडी में सौंफ की आवक की बिक्री होने लगी हैं, जो बड़वानी से करीब 40 किमी दूर है। ऐसे में धार जिले के अधिकांश किसान वहीं अपनी उपज बेचने में रुचि दिखा रहे हैं। वर्तमान में गंधवानी मंडी में सौंफ की बंपर आवक के साथ भावों में 10 से 12 हजार रुपए प्रति क्विं. भाव अधिक मिल रहा हैं। इसके चलते बड़वानी कृषि उपज मंडी में सौंफ की आवक कम बोरी पहुंच पा रही हैं। जबकि कुछ वर्ष पूर्व तक मंडी में सौंफ की आवक ढाई से तीन हजार बोरी तक रहती थी। हालांकि इस रविवार सीजन में पहली बार सौंफ आवक 1800 बोरी से अधिक रही। व्यापारियों के अनुसार सौंफ की आवक अप्रैल माह तक बरकरार रहेगी।
*सौफ के दाम मिल रहे कम किसानों की उपज का दाम निकालना हुँआ मुश्किल*
धार जिले के उमरबंद से आया किसान अंतर ने बताया कि वे ओर उनके साथी किसान बड़वानी की सौफ मंडी में सौफ लेकर आए है जहाँ एक ओर सौफ के दाम कम मिल रहे है जिससे किसानों में खाशा नाराजगी छा रही है जिससे उनके उनकी उपज का उचित दाम नही मिल पाने से निराश किसानों को कर्ज की तले दबने पर मजबूर हो गए है वही किसान अंतर ने कहा कि करीब 15 बोरी सौफ लेकर आया हूँ जिसमें दो बोरी मोटी ओर बाकी अन्य बोरिया बारीक सौफ की है वही व्यापारी द्वारा बारीक सौफ के दाम 150 व मोटे दाने की 70 से 80 के बीच का दाम में मांग रहे है ऐसे में भाड़ा खर्च व उपज की लागत की मेहनत मजदूरी निकालनी मुश्किल हो गई है न तो यहाँ भीषण गर्मी में ठंडे पेयजल की सुविधा है और न ही सुलभ शौचालय की व्यवस्था है जिससे इधर उधर जाकर शौचालय जाने के लिए मजबूर है ओर नही उचित सुविधा ठहरने की है जिससे दुर दराज से आए किसानों को विश्राम भवन की पर्याप्त सुविधा मिल सके
*अस्थाई दुकानें, पार्किंग व्यवस्था नहीं सुधरी*
प्रति रविवार लगने वाली कृषि उपज मंडी परिसर में बाइक व चार पहिया वाहनों की पार्किंग व्यवस्था में कोई सुधार नहीं आया। वाहन चालक जहां-तहां मनमर्जी से पार्किंग करते रहे, जिससे किसान, व्यापारियों और आम लोगों को आवागमन में परेशानी आई। वहीं मंडी के बाहर राजघाट रोड के दोनों किनारों पर सड़क तक अस्थाई दुकानों का कब्जा पीछे नहीं हटा। बता दें कि गत सप्ताह मंडी के सामने बीच रोड पर भी पूर्व में जाम के हालात बने थे। हॉलाकि इसी मार्ग पर बसे निजी अस्पतालें, बसाहटें व राजघाट-नर्मदा तट का मुख्य मार्ग होने से आपातकालिन स्थिति में समस्या आ सकती हैं।

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