श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा मोगरा में कलश यात्रा के साथ शुरू

भागवत कथा सुनने मात्र से ही मनुष्य के पाप नष्ट हो जाते हैं : डॉ पुष्कर परसाई 

सर्वेश चौहान 


रेहटी! तहसील के ग्राम मोगरा में आज से भागवत कथा प्रारंभ हुई जिसमें विशाल कलश यात्रा खेड़ापति मंदिर से प्रारंभ होकर  होकर ग्राम के प्रमुख मार्ग से होते हुए बाजों-गाजों के साथ कलश व भागवत पुराण यात्रा निकाली गई, जिसमें मुख्य यजमान सिर पर पुराण रखकर तो महिलाएं सिर पर कलश रखकर चलीं। कथा के प्रथम दिवस पर डॉ. पुष्कर परसाई जी ने श्रीमद् भागवत कथा का महत्व बताया। आचार्य श्री ने धुंधकारी की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि आत्मदेव नाम के एक धार्मिक ब्राह्मण की पत्नी धुंधली नास्तिक थी। दंपति को संतान नहीं थी। एक महात्मा ने आत्मदेव को पुत्र प्राप्ति के लिए एक फल दिया।

धुंधली ने वह फल गाय को खिला दिया। उसने अपनी गर्भवती बहन के बच्चे को अपना बताकर ले आई। इस बच्चे का नाम धुंधकारी रखा गया। उसी समय गाय ने भी एक बालक को जन्म दिया, जिसका नाम गोकर्ण रखा गया।

गोकर्ण ज्ञानी और धर्मात्मा बना। धुंधकारी दुराचारी निकला। उसने कई कुकर्म किए।और वह प्रेत बन गया। गोकर्ण ने सूर्य भगवान के मार्गदर्शन पर भागवत कथा का आयोजन किया। कथा श्रवण से धुंधकारी को प्रेत योनि से मुक्ति मिली।  आयोजक समिति के प्रमुख पंकज गौर ने सभी भक्तों से कथा में पधारने का आग्रह किया