अनूपपु्र / भारत मे हिन्दुओं को मजबूत और एकजुट बनाए रखने के लिये वीर शिवाजी ने जीवन भर मुगलों से संघर्ष किया । उन्होंने अपने शौर्य से  हिन्दू पदपाद शाही की स्थापना की ।
महाराणा प्रताप ने देश के गौरव और स्वाभिमान के लिये घास की रोटी खाई लेकिन कोई समझौता नहीं किया‌। गुरु गोविन्द सिंह जी शहादत कौन भूल सकता है। देश के नागरिकों मे राष्ट्र भक्ति का भाव बना रहे , देश मे अनुशासित और  कर्तव्यनिष्ठ नागरिक तैयार हों, हिन्दू समाज एकजुट और मजबूत रहे इसलिए संघ की स्थापना हुई। अनूपपु्र के रजहाधाम हनुमान मन्दिर मे 18 जनवरी रविवार को आयोजित हिन्दू सम्मेलन मे उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए मुख्यवक्ता के रुप मे समाजसेवी दीपक नामदेव ने उपरोक्त विचार व्यक्त किये। उन्होने कहा कि हेडगेवार जी ने कहा था कि कोई देश चाहे जितने उन्नत हथियार बना ले, उन्हे चलाने के लिये आपको समर्पित राष्ट्र भक्त वीर युवाओं की जरुरत होती है।
आज दुनिया संघ को जानना ,समझना चाहती है। संघ हमेशा से महापुरुषों की दी हुई शिक्षा, दिखलाए गये मार्ग पर चलता आया है। हममे स्व का भाव होना चाहिए ।हमें स्वदेशी को अपनाना चाहिए।
जाति पाति के भेद से दूर रहकर सामाजिक समरस समाज निर्माण का कार्य करना चाहिए।परशुराम जी, अंबेडकर, गुरु गोविंद सिंह, रविदास जी,संत नामदेव, तुकाराम ने संस्कृति और समूचे मानवता के लिये कार्य किया। हमे भी  अधिकार से पहले कर्तव्य भाव को महत्व देना चाहिए।हमारे लिये राष्ट्र सर्वोपरि है और राष्ट्र के किये संघ की स्थापना की गयी।
श्री नामदेव ने कहा कि हम बच्चों को संस्कार देने मे विफल हैं, इसलिए परिवार, समाज और देश कमजोर हो रहा है।
हम या हमारा हृदय छोटा नहीं है। हमारे देश मे आक्रमण कारी आए और यहीं बस गये । हमने उन्हें स्वीकार कर लिया ,यही हमारा संस्कार है। हमारे मन मे किसी के प्रति बैर भाव नहीं है, यही हमारा संस्कार है। हम छोटे - छोटे मुद्दों मे उलझ कर आपस मे मतभेद कर लेते हैं। समाज को जोडने, एकजुट रखने, राष्ट्र को मजबूत बनाने और संस्कृति की रक्षा के लिये हमे हिन्दू सम्मेलन करना पड रहा है। हमारी हिन्दू संस्कृति विश्व कल्याण, वसुधैव कुटुंकम की भाव से परिपूर्ण है। हमारी हिन्दू संस्कृति मे अलग- अलग पूजा पद्धति अलग - अलग होने के बावजूद हम एकजुट हैं।
मन्दिर, मठ , विश्वविद्यालय हमारी संस्कृति का बडा आधार रहा है। 
मुगलों, अंग्रेजों के आक्रमण के बावजूद हमारे महापुरुषों ने संघर्ष करके हमारी शिक्षा, संस्कृति, परंपराओं और गौरव बचाए रखा।
मुख्य वक्ता के रुप मे दीपक जी ने कहा कि आज हमे देश मे हिन्दू सम्मेलन करना पड रहा है। जब - जब देश पर संकट आया है , भारत के लोग अधिक मजबूती से एकजुटता के साथ आगे आए हैं।
इससे विशिष्ट वक्ता  पूर्व मातृशक्ति श्रीमती निधि तिवारी ने देश की मजबूती मे संयुक्त परिवार के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत माता को समर्पित होने वाली माला मे अलग - अलग पुष्प होते हैं। भगवान श्री राम को भी पांच प्रकार के पुष्प से बनी माला अर्पित करते हैं।
भारत केवल धरती का टुकडा मात्र नहीं है। हम सब मिलकर भारत हैं । आप हैं ,ये बच्चे, नारी शक्ति ,पर्वत ,नदी, धरती, जमीन, आसमान, वन ,खेत, मन्दिर ,परिवार, गांव,शहर मिल कर देश हमारी भारत माता हैं। हमें अपने परिवार को समृद्ध बनाने के लिये प्रयास करना चाहिए । समृद्ध कुटुंब ही मजबूत राष्ट्र का निर्माण करता है। वसुधैव कुटुम्बकम का पवित्र भाव हमारे परिवार से शुरु होता है।  समय रहते सचेत होने की जरुरत है। हमारा देश यूक्रेन ना बने इसलिए बच्चों को अनुशासित, राष्ट्र भक्त , संस्कारित और मजबूत बनाने की जरुरत है।
  आचार्य पं अजय शास्त्री ने अपने सारगर्भित उद्बोधन मे कहा कि भारत को कमजोर करने, तोडने के लिये विदेशी ताकतें लगाकर प्रयास करती रही हैं । हमारा भारत देश युगो- युगों से देवभूमि के रुप मे विख्यात रहा है‌ । यह देवी देवताओं, महापुरुषों, संत - महात्माओं की पावन धरा है। यह सत्य सनातन पावन हिन्दू धरा है। हम सदैव वसुधैव कुटुम्बकम की भावना और विश्व कल्याण की प्रार्थना से सभी  मानव ,जीव जन्तु ,वनस्पतियों के सुखी सम्पन्न रहने वाली संस्कृति के लोग हैं। जाति ,रंग, भाषा, प्रांत के आधार पर हमे कमजोर करने वाली ताकतों से सावधान रहना होगा। आयोजन के मुख्य अतिथि बस्ती के वरिष्ठ नागरिक रामचंद्र पाण्डेय थे‌ ।