अमरकंटक - मां नर्मदा की उद्गम स्थली, पवित्र नगरी अमरकंटक की वादियों में इन दिनों भक्ति, चेतना और सामाजिक परिवर्तन की स्वर-लहरियां गूंज रही हैं। श्रद्धालु जहां एक ओर नर्मदा दर्शन कर आध्यात्मिक शांति का अनुभव कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भजन-कीर्तन के माध्यम से समाज को नई दिशा देने का अनुकरणीय प्रयास भी जारी है।

छत्तीसगढ़ के ग्राम गोविंदपुर बावनघासी स्थित सखा आश्रम परशुरामपुर से आई भजन-कीर्तन मंडली इस अभियान का संचालन कर रही है, जो भक्ति और सामाजिक उत्तरदायित्व का अद्भुत संगम प्रस्तुत करती.

भक्ति के माध्यम से समाज सुधार

मंडली के सदस्य गांव-गांव भ्रमण कर भजनों के जरिए नशामुक्ति का संदेश दे रहे हैं और समाज को आत्मचिंतन की ओर प्रेरित कर रहे हैं। मंडली के क्षेत्राधिकारी पुरन सिंह मरकाम ने बताया कि इस मंडली के 32 सदस्य मां नर्मदा के दर्शनार्थ अमरकंटक पहुंचे हैं। माता राजमोहनी के अनन्य भक्त इन सदस्यों का यह जनजागरण अभियान उनके प्रेरणा, मार्गदर्शन एवं आदेश से संचालित हो रहा है।

सामाजिक विषयों पर जागरूकता

भजन-कीर्तन के दौरान न केवल नशामुक्ति का आह्वान किया जा रहा है, बल्कि बच्चों को नियमित रूप से पाठशाला भेजने, शिक्षा के महत्व को समझाने, सनातन धर्म की रक्षा, सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण तथा गौ संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक विषयों पर भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इन भक्ति के सुरों में पिरोए गए संदेश सीधे जनमानस के हृदय को छू रहे हैं।

स्थानीय प्रभाव और सहभागिता

इस आध्यात्मिक-सामाजिक अभियान का स्थानीय लोगों पर सकारात्मक और गहरा प्रभाव देखने को मिल रहा है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु, ग्रामीण, युवा एवं महिलाएं भजन-कीर्तन में सहभागिता कर रहे हैं। लोग न केवल श्रद्धा से भजनों का श्रवण कर रहे हैं, बल्कि उनमें निहित सामाजिक संदेशों को अपने जीवन में आत्मसात करने का संकल्प भी ले रहे हैं।

अमरकंटक की पावन भूमि पर चल रहा यह अभियान सिद्ध करता है कि जब भक्ति को सामाजिक चेतना से जोड़ा जाता है, तो वह समाज परिवर्तन का सशक्त माध्यम बन सकती है। आध्यात्मिक साधना के साथ समाज को सही दिशा देने का यह प्रयास न केवल सराहनीय है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत भी बन रहा है।