पाली नगर में बस स्टैंड की दुकानों को लेकर नगर पालिका विवादों में

उमरिया जिले के पाली नगर में स्थित साईं मंदिर के समीप नवनिर्मित बस स्टैंड की दुकानों की टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। नगर पालिका परिषद पाली की इस योजना पर आरोप है कि यह रोजगार प्रदान करने की बजाय चुनिंदा लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए तैयार की गई है।

टेंडर प्रक्रिया और आरोप:

  • नगर पालिका द्वारा जारी ई-टेंडर में बस स्टैंड परिसर की 13 दुकानों की आरक्षित कीमत 32 लाख रुपये से लेकर 44 लाख रुपये तक तय की गई है।
  • अमानत राशि 2.5 प्रतिशत रखी गई है, जो 80 हजार से 1 लाख 12 हजार रुपये तक है, साथ ही 5000 रुपये निविदा शुल्क भी निर्धारित है।
  • निविदा की अंतिम तिथि 9 और 10 अप्रैल 2026 तय की गई है।

स्थानीय बेरोजगार युवाओं का आरोप है कि इतनी ऊंची बोली और अमानत राशि तय कर उन्हें इस प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया है। उनका कहना है कि यह योजना उनके लिए नहीं, बल्कि पहले से तय लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए है।

बाजार में चर्चाएं और प्रतिक्रियाएं:

  • व्यापारी वर्ग और आम नागरिकों में चर्चा है कि यह टेंडर प्रक्रिया विशेष लोगों के लिए तैयार की गई है।
  • कई लोग इसे 'सेटिंग का खेल' कह रहे हैं और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर भी सवाल उठ रहे हैं।

पाली कांग्रेस कमेटी के ब्लॉक अध्यक्ष रवि मिश्रा ने भी इस मुद्दे पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया केवल धन्ना सेठों के लिए है और गरीब व बेरोजगार युवाओं को बाहर कर दिया गया है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से इस प्रक्रिया पर पुनर्विचार करने की मांग की है।

निष्कर्ष:

फिलहाल, बस स्टैंड की दुकानें रोजगार का जरिया बनने के बजाय नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जनप्रतिनिधि इस आक्रोश को कैसे संभालते हैं या इसे नजरअंदाज करते हैं।