रीवा-अमरकंटक मार्ग पर संकट: एसईसीएल सोहागपुर की लापरवाही से धनपुरी में बढ़ता प्रदूषण और बीमारियां
शहडोल, धनपुरी: धनपुरी अब एक ऐसा शहर बन चुका है जहां विकास के नाम पर बर्बादी मोल ली जा रही है। जिस कोयले ने देश को रोशनी दी, वही अब धनपुरी को अंधेरे, धुएं और बीमारी की ओर धकेल रहा है। इस त्रासदी का केंद्र है एसईसीएल सोहागपुर एरिया।
रीवा-अमरकंटक मुख्य मार्ग की स्थिति अब किसी सड़क जैसी नहीं रही। गड्ढों और धूल के जाल में फंसी यह सड़क अब हर सफर को खतरनाक बना देती है। बगिया पुलिया से लेकर खदान क्षेत्र तक सड़क पूरी तरह से उखड़ चुकी है। भारी वाहनों की बेलगाम आवाजाही और अंधाधुंध खुदाई ने इस मार्ग को निगल लिया है। धूल का गुबार इतना घना है कि सामने से आता वाहन तक नजर नहीं आता, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ गई है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर एसईसीएल और संबंधित विभाग किस दिन का इंतजार कर रहे हैं? क्या किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार हो रहा है ताकि बाद में मुआवजे का ढोंग किया जा सके?
धनपुरी की हवा अब सांस लेने लायक नहीं बची है। बिना तिरपाल दौड़ते ट्रक खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए सड़कों पर कोयला गिराते चलते हैं। यही कोयला बाद में जहर बनकर लोगों के फेफड़ों में उतरता है। हर घर में खांसी और हर गली में बीमारी का बोलबाला है।
डॉक्टर लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि ये हालात फेफड़ों की गंभीर बीमारियों को जन्म दे रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी इस त्रासदी को और भयावह बना रही है। न कोई सर्वे, न कोई मेडिकल कैंप, न कोई राहत योजना — ऐसा लगता है जैसे यहां के लोगों को उनके हाल पर मरने के लिए छोड़ दिया गया है।
एसईसीएल सोहागपुर एरिया पर अब सीधे सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या कोयले की कमाई के लिए इंसानियत को पूरी तरह कुचल दिया गया है? सड़कें टूटती रहीं, धूल बढ़ती रही, लोग बीमार होते रहे, लेकिन जिम्मेदारों ने आंखें बंद कर लीं। यह लापरवाही नहीं बल्कि मुनाफे के लिए की जा रही संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है।
धनपुरी की जनता अब जवाब चाहती है:
- बिना तिरपाल ट्रकों पर कार्रवाई कब होगी?
- रीवा-अमरकंटक मार्ग की मरम्मत कब शुरू होगी?
- प्रदूषण रोकने के ठोस उपाय कब लागू होंगे?
- स्वास्थ्य सेवाओं को सक्रिय कब किया जाएगा?
- जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी?
अगर अब भी सिस्टम नहीं जागा, तो यह सिर्फ प्रशासनिक विफलता नहीं बल्कि इतिहास में दर्ज होने वाला अपराध होगा। क्योंकि जब लोगों की सांसें छीन ली जाएं, तो खामोशी भी गुनाह बन जाती है।
Continue With Google
Comments (0)