बेटी और नवजात को खोया, अब न्याय के लिए जिंदगी दांव पर… 13 दिनों से आमरण अनशन पर पिता
STATE NEWS AI JOURNALIST SURAJ KUMAR
रीवा। भाजपा सरकार के जर्जर सिस्टम और कथित संवेदनहीनता पर सवाल खड़े करने वाला मामला रीवा से सामने आया है। संजय गांधी अस्पताल में कल्पना मिश्रा और उनके नवजात शिशु की मौत के बाद अब एक पिता न्याय की मांग को लेकर पिछले 13 दिनों से आमरण अनशन पर बैठा है।
एक पिता ने पहले अपनी बेटी को खोया, फिर नवजात बच्चे की मौत का सदमा झेला। परिवार पर दोहरी त्रासदी टूट पड़ी, लेकिन दर्द यहीं खत्म नहीं हुआ। अब यही पिता अपनी बेटी और नवजात के लिए न्याय की मांग करते हुए अपनी सेहत तक दांव पर लगा चुका है।
परिवार की ओर से अस्पताल में उपचार के दौरान कथित चिकित्सकीय लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पिता की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो और दोषियों पर कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाए।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब एक पीड़ित पिता 13 दिनों से न्याय के लिए भूखा बैठा है, तो जिम्मेदार व्यवस्था उसकी आवाज आखिर कब सुनेगी?
जांच के आदेश और प्रशासनिक कार्रवाई अपनी जगह है, लेकिन पीड़ित परिवार की मांग है कि जांच केवल कागजों तक सीमित न रहे। अगर जांच में किसी की लापरवाही या आपराधिक जिम्मेदारी सामने आती है तो उसके खिलाफ ठोस कानूनी कार्रवाई हो।
आज सवाल सिर्फ एक परिवार का नहीं है। सवाल उस स्वास्थ्य व्यवस्था का है, जहां इलाज के लिए अस्पताल पहुंचने वाला परिवार अगर अपनों को खो देता है, तो जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया इतनी लंबी क्यों हो जाती है?
एक पिता अपनी बेटी और नवजात को वापस नहीं ला सकता, लेकिन वह चाहता है कि उनकी मौत का सच सामने आए और जिम्मेदारों की जवाबदेही तय हो।
सरकार और प्रशासन से यही मांग है कि मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कराई जाए, पीड़ित परिवार को स्पष्ट जवाब दिया जाए और दोष सिद्ध होने पर जिम्मेदारों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
क्योंकि न्याय में देरी, उस पिता के दर्द को और गहरा कर रही है जो 13 दिनों से अपनी आवाज बुलंद किए बैठा है।
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