शहडोल में रेत माफियाओं का आतंक: अवैध उत्खनन पर प्रशासन मौन

शहडोल। जिले में रेत खदानें भले ही बंद हों, लेकिन रेत माफियाओं का अवैध कारोबार अपने चरम पर है। अमलाई, धनपुरी और बुढार क्षेत्रों में रात होते ही रेत की चोरी शुरू हो जाती है। नदियों और घाटों से खुलेआम रेत निकाली जाती है और भारी वाहनों से परिवहन किया जा रहा है। यह स्थिति इस कदर बिगड़ चुकी है कि कानून और प्रशासन का कोई खौफ नहीं रह गया है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि रातभर रेत निकाली जाती है और ट्रैक्टर-ट्रॉलियां तेज रफ्तार में आबादी वाले इलाकों से गुजरती हैं। इससे सड़क हादसों का खतरा बढ़ गया है और आम जनजीवन पर भी संकट मंडरा रहा है। ग्रामीणों ने कई बार शिकायतें की हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग सिर्फ औपचारिकता निभा रहा है।

सबसे बड़ा सवाल उठता है कि जब जिले की रेत खदानें बंद हैं, तो इतनी बड़ी मात्रा में रेत कहां से आ रही है? कहीं न कहीं यह संकेत देता है कि इस अवैध कारोबार को संरक्षण प्राप्त है।

हाल ही में पाली क्षेत्र में पुलिस और रेत माफियाओं के बीच हुई मुठभेड़ का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में विवाद और अफरा-तफरी का माहौल साफ देखा जा सकता है। इस घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, घटना के बाद कुछ वाहन जब्त किए गए, लेकिन अब तक किसी बड़ी कार्रवाई की कोई जानकारी नहीं है।

लगातार हो रहे अवैध उत्खनन से पर्यावरण पर भी गंभीर असर पड़ रहा है। नदियों का जलस्तर प्रभावित हो रहा है और घाटों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पर जल्द रोक नहीं लगी, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से अवैध रेत कारोबार पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि सिर्फ छोटे वाहन पकड़ने से काम नहीं चलेगा, बल्कि इस नेटवर्क के पीछे के बड़े चेहरों को सामने लाना होगा।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कोई बड़ी कार्रवाई करता है या फिर रेत माफियाओं का आतंक यूं ही जारी रहेगा।