गंदगी के बीच कैसे हो भविष्य निर्माण

गोबर शराब की बोतलों झाड़ियों के बीच पढ़ने मज़बूर नौनिहाल


बरगी: बच्चों के भविष्य की चिंता भले ही सरकार कर रही हो पर जमीनी हकीकत इसके कोसों दूर है ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों की क्या स्थिति हैं ये देखने वाला कोई नहीं है शासकीय स्कूलों में बच्चे पढ़ने जाएं भी तो कैसे जाएं स्कूलों में सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं है न बच्चों के लिए स्वच्छ परिसर है ना ही बच्चों के लिए स्कूल में पंखों की व्यवस्था है ना ही पढ़ने के लिए अच्छे ब्लैकबोर्ड है आखिर बच्चे शासकीय स्कूलों में किस हिसाब से पढ़ाई करें 
मामला बरगी से कुछ दूर स्थित ग्राम जोगीधाना के माध्यमिक शाला का है जहां बाउंड्री वॉल ना होने के कारण जानवर स्कूल के अंदर बैठते हैं और गंदगी फैलाते हैं वही बाउंड्री बोल ना होने के कारण रात में यह स्थान शराबियों का अड्डा बन जाता है और जगह-जगह शराब की बोतले एवं पानी के पाउच बिखरे हुए रहते हैं स्कूल में चारों ओर कीचड़ एवं घास फूस नजर आती है उससे आए दिन जंगली जानवरों एवं बारिश के समय विषैले जीवों का खतरा बना रहता है स्कूल स्टाफ द्वारा पंचायत को आवेदन देकर कई बार बाउंड्री बॉल के लिए मांग की गई एवं सफाई व्यवस्था के लिए भी पत्राचार किया गया परंतु आज भी स्थिति जस की तस है गंदगी के चलते मच्छर मक्खियों की अधिकता के कारण भी बच्चों को बीमारी का खतरा बना हुआ है 

स्कूल स्टाफ द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी को भी पत्र लिखकर स्कूल में लाइट पंखे ब्लैक बोर्ड आदि की मांग की गई है जिससे स्कूल में पढ़ रहे बच्चों को अच्छी सुविधा के साथ अच्छी शिक्षा भी मिल सके