मध्य प्रदेश के रीवा जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को बेहतर बनाने और प्रशासनिक कसावट लाने के लिए उच्च स्तर पर गंभीर कदम उठाए जा रहे हैं। रीवा संभाग के कमिश्नर श्री शीलेन्द्र सिंह ने हाल ही में संजय गांधी चिकित्सालय और अन्य अस्पतालों में लगातार सामने आ रही लापरवाही की घटनाओं तथा आकस्मिक स्थितियों को बेहद गंभीरता से लिया है। इसी सिलसिले में रीवा कलेक्ट्रेट में एक महत्वपूर्ण और उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और चिकित्सा जगत के प्रमुख अधिकारी मुख्य रूप से शामिल हुए, जिनमें कलेक्टर श्री नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी, पुलिस अधीक्षक डॉ. गुरकरन सिंह, संजय गांधी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. प्रियंक शर्मा और मेडिकल कॉलेज के प्रभारी डीन डॉ. मनोज इंदुरकर प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

कमिश्नर श्री शीलेन्द्र सिंह ने बैठक के दौरान स्पष्ट निर्देश दिए कि संजय गांधी चिकित्सालय सहित संभाग के अन्य सभी अस्पतालों में मरीजों को उत्कृष्ट और उच्च कोटि की चिकित्सा सेवाएं प्रदान की जानी चाहिए। दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से आने वाले तथा स्थानीय मरीजों का समुचित एवं बेहतर इलाज हर हाल में सुनिश्चित किया जाए। मरीजों को अस्पताल के भीतर बेहतर और आरामदायक माहौल देने के लिए यह जरूरी है कि वार्डों में उपयोग होने वाली बेडशीट, कंबल और गद्दे पूरी तरह से साफ-सुथरे रखे जाएं। इसके साथ ही, चिकित्सालय परिसर और वार्डों में नियमित रूप से साफ-सफाई कराने के भी कड़े निर्देश दिए गए हैं, ताकि संक्रमण का कोई खतरा न रहे।

डॉक्टरों की समय पर उपस्थिति और लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी

समीक्षा बैठक के दौरान चिकित्सा व्यवस्थाओं को लेकर कमिश्नर ने दो टूक शब्दों में कहा कि मरीजों के इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही या कोताही को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने सभी चिकित्सकों को निर्देश दिए कि वे अपने निर्धारित ड्यूटी समय पर अस्पताल में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें। यदि कोई भी चिकित्सक अपने ड्यूटी समय से अनुपस्थित पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध तत्काल और कठोर प्रभावशील कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

चिकित्सकीय अमले की कार्यप्रणाली पर पैनी नजर रखने के लिए कमिश्नर ने जिला कलेक्टर को विशेष निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कलेक्टर यह सुनिश्चित करें कि अस्पताल में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की उपस्थिति की समय-समय पर जांच करने के लिए कार्यपालिक मजिस्ट्रेट (कार्यपालिक दण्डाधिकारी) की तैनाती की जाए। इसके अलावा, मेडिकल कॉलेज के प्रभारी डीन को यह निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रतिदिन सभी डॉक्टर्स के साथ एक नियमित बैठक आयोजित करें। इस बैठक में पूरे दिन की जाने वाली चिकित्सा गतिविधियों और कार्यों की एक स्पष्ट कार्य-योजना (Action Plan) तैयार की जाए और उसी कार्य-योजना के अनुसार अपने सभी दायित्वों का संपादन किया जाए।

सुरक्षा व्यवस्था में सुधार और मीडिया समन्वय के लिए निर्देश

संजय गांधी अस्पताल में आए दिन होने वाली आकस्मिक घटनाओं और भीड़भाड़ की स्थिति को देखते हुए कमिश्नर ने सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अस्पताल के अधीक्षक से कहा कि वे अपनी सुरक्षा सेवा (Security Service) में आवश्यक और तत्काल सुधार करें। अस्पताल में ऐसी सुरक्षा एजेंसी से प्रशिक्षित और कुशल (Skilled) सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया जाए, जो किसी भी आकस्मिक भीड़, विवाद या आपातकालीन स्थिति के दौरान अपनी ड्यूटी को पूरी मुस्तैदी और बेहतर ढंग से क्रियान्वित कर सकें।

अस्पताल परिसर में पारदर्शिता बनाए रखने और भ्रामक जानकारियों को रोकने के लिए मीडिया समन्वय पर भी विशेष जोर दिया गया। कमिश्नर ने निर्देश दिए कि अस्पताल के भीतर घटने वाली किसी भी प्रकार की आकस्मिक या अप्रत्याशित घटना की आधिकारिक और सही जानकारी मीडिया तक पहुँचाने के लिए किसी सक्षम अधिकारी की नियुक्ति की जाए। यही प्राधिकृत अधिकारी मीडिया को समय पर सटीक जानकारी उपलब्ध कराएगा।

इसके अलावा, मरीजों के स्वास्थ्य लाभ और शांतिपूर्ण माहौल को बनाए रखने के लिए यह तय किया गया कि अस्पताल में भर्ती मरीजों के साथ रहने वाले अटेंडर्स (परिजनों) की संख्या अब पैरामेडिकल स्टाफ द्वारा तय की जाएगी। किसी भी परिस्थिति में वार्डों या कमरों में अटेंडर की संख्या निर्धारित मानक से अधिक नहीं होनी चाहिए। सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने के लिए पुलिस अधीक्षक को निर्देशित किया गया कि वे अपनी पुलिस मोबाइल टीम की गतिविधियों को आक्रामक रूप से बढ़ाएं, ताकि चिकित्सालय परिसर में मोबाइल टीम हमेशा सक्रिय रहकर कानून-व्यवस्था बनाए रखे।

ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसव सेवाओं को बढ़ावा देने पर जोर

मेडिकल कॉलेज और बड़े अस्पतालों पर अत्यधिक दबाव को कम करने के लिए कमिश्नर ने ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने प्रभारी डीन और स्वास्थ्य अधिकारियों से कहा कि जिले और संभाग में संचालित सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) में गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित प्रसव (डिलेवरी) कराए जाने की पुख्ता व्यवस्था हो।

कमिश्नर ने निर्देश दिए कि इसके लिए एएनएम (ANM) को भी डिलेवरी कराने का पर्याप्त और व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाए। उन्होंने लक्षित निर्देश देते हुए कहा कि प्रत्येक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रतिदिन कम से कम 10 प्रसव कराए जाने चाहिए, ताकि मरीजों को अनावश्यक रूप से रीवा के बड़े अस्पतालों तक न दौड़ना पड़े और मेडिकल कॉलेज व अन्य बड़े चिकित्सालयों पर अतिरिक्त भार आने से रोका जा सके।

अवैध और कच्ची शराब के खिलाफ आबकारी विभाग को सख्त कार्रवाई के निर्देश

समीक्षा बैठक के दूसरे प्रमुख हिस्से में कानून-व्यवस्था और आबकारी मामलों पर गहन मंथन किया गया। पड़ोसी जिले सागर में हुई जहरीली शराब की घटना का हवाला देते हुए कमिश्नर श्री शीलेन्द्र सिंह ने आबकारी अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी स्थिति में सागर जिले जैसी घटना रीवा संभाग के किसी भी जिले में घटित नहीं होनी चाहिए। यदि भविष्य में ऐसी कोई दुर्भाग्यपूर्ण घटना सामने आती है, तो संबंधित आबकारी अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार सबसे सख्त कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

कमिश्नर ने आबकारी अधिकारी को निर्देश दिए कि वे संभाग के सभी जिलों में अवैध, मिलावटयुक्त और कच्ची शराब की सप्लाई तथा उसकी खुली बिक्री पर तुरंत प्रभावशील और ताबड़तोड़ कार्रवाई करना सुनिश्चित करें। पुलिस विभाग की टीमों के साथ संयुक्त रूप से समन्वय स्थापित कर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में औचक छापामार कार्रवाई की जाए। सीमावर्ती प्रदेशों से लगे हुए संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष तौर पर नजर रखते हुए सघन गश्त बढ़ाई जाए और अवैध शराब का भंडारण करने वालों पर नकेल कसी जाए।

विभाग की अब तक की कार्यप्रणाली पर असंतोष व्यक्त करते हुए कमिश्नर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि अवैध शराब के ठिकानों पर टीम लगातार सर्चिंग अभियान चलाए और की गई कार्रवाई धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखाई देनी चाहिए। उन्होंने आबकारी अधिकारियों को यह भी पाबंद किया कि वे ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों की सभी मदिरा दुकानों से मदिरा के नमूने (सैंपल) अनिवार्य रूप से लें और उनकी गुणवत्ता की जांच कराएं। कमिश्नर ने चेतावनी दी कि अवैध और मिलावटी शराब के सेवन से यदि किसी भी नागरिक की मृत्यु होती है, तो इसके लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।

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