जिले में बेरोजगारी के बढ़ते संकट और रोजगार के घटते अवसरों के बीच, उमरिया चपहा कालरी (जोहिला क्षेत्र) को बंद होने से बचाने के लिए हिन्दू-मुस्लिम एकता मंच एवं एकता युवा शक्ति संगठन ने एकजुट होकर आंदोलन किया। सैकड़ों लोग तिरंगा लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और महामहिम राज्यपाल महोदय एवं कलेक्टर महोदया के नाम ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन की मुख्य बातें:

  • उमरिया कालरी को जिले की जीवनदायिनी बताते हुए इसके बंद होने से हजारों श्रमिकों और व्यापारियों की आजीविका खतरे में पड़ने की बात कही गई।
  • संगठन ने खदान को हर हाल में चालू रखने और फंसे कोयले के सुरक्षित खनन के लिए तकनीकी एवं प्रशासनिक कदम उठाने की मांग की।
  • जमुनिया क्षेत्र में पानी निकासी के कार्य को किसानों की भूमि के अभाव के कारण रुका हुआ बताया गया। संगठन ने किसानों से संवाद कर समाधान की अपील की।
  • एसईसीएल प्रबंधन और शासन से सकारात्मक पहल की मांग करते हुए भूख हड़ताल की चेतावनी दी गई।

हिंदू-मुस्लिम एकता मंच के संस्थापक मो. असलम शेर ने कहा कि कालरी का बंद होना जिले के आर्थिक भविष्य पर सीधा हमला है। उन्होंने सरकार और एसईसीएल प्रबंधन से ठोस निर्णय लेने की अपील की, अन्यथा बेरोजगारी और पलायन की समस्या और भी गंभीर हो जाएगी।

उपस्थिति और समर्थन:

इस अवसर पर सैकड़ों लोग मौजूद रहे, जिनमें राजेंद्र भाई, जगदीश जयसवाल, अल्ताफ खान, कृष्ण कांत तिवारी, नसरीन बानो, आदि प्रमुख थे। सभी ने हाथों में तिरंगा लेकर उमरिया कालरी को बचाने और जिले के विकास की मांग को लेकर अपनी आवाज बुलंद की।

उमरिया कालरी को बचाना जिले के अस्तित्व और युवाओं के भविष्य के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है। संगठन ने शासन से तत्काल प्रभावी कार्रवाई की मांग की और जनहित में व्यापक आंदोलन की चेतावनी दी।