हनुमान जी कलियुग में सर्वव्यापी होकर राम भक्तों की रक्षा करते हैं: पं निर्मल कुमार शुक्ल 

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बैतूल। हनुमान जी महाराज रामायण में प्राणवायु की भूमिका में हैं जैसे पवन देवता सर्वव्यापी हैं उसी प्रकार प्रकार पवन तनय बल पवन समाना। हनुमान जी भी चराचर में व्याप्त होकर राम भक्तों की रक्षा में तत्पर रहते हैं। साधु संत के तुम रखवारे कह कर गोस्वामी तुलसीदास जी ने इनकी सार्वभौमिक उपस्थित स्वीकार किया है। हनुमान जी का प्रताप चारों युगों में स्पष्ट दिखाई पड़ता है। सतयुग में भगवती दुर्गा के आगे उनकी ध्वजा लेकर आप चलते हैं द्वापर में सुग्रीव की ध्वजा लेकर राम सेवा में तल्लीन रहते हैं और द्वापर युग में अर्जुन के रथ की ध्वजा पर इनका निवास होता है तथा कलियुग में तो हर गांव नगर में हनुमान जी सर्वव्यापक रहते हैं। उक्त उद्गार न्यू बैतूल स्कूल ग्राउंड में राजेश अवस्थी व संगीता अवस्थी द्वारा आयोजित श्री हनुमत कथा में मानस महारथी पं निर्मल कुमार शुक्ल जी ने व्यक्त किया। आपने कहा कि हनुमान जी भगवान श्री राम से मिलने के माध्यम हैं। भगवान राम के द्वार के रक्षक हैं बिना इनकी अनुकम्पा हुए जीव श्री राम के चरणों तक नहीं पहुंच सकता। हनुमान जी भोग और भगवान दोनों को मिला देते हैं। जिस पर इनकी कृपा हो जाती है उसे संसार के सारे सुख और भगवान दोनों मिल जाते हैं। तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हां। राम मिलाय राज पद दीन्हा। प्रायः परमात्मा को पाने के लिए घर परिवार धन ऐश्वर्य सब छोड़कर वन में रहकर साधना करना पड़ता है तब बड़ी कठिनाई से परमात्मा की प्राप्ति होती है किन्तु जिसने हनुमान जी का आश्रय ले लिया उसे घर परिवार में रहते हुए भी भगवान सुलभ हो जाते हैं। अवस्थी परिवार द्वारा लगातार नौ दिनों तक श्री हनुमान जी की कथा का आयोजन किया गया है। इसमें रामायण प्रेमियों को विस्तार से हनुमान जी की गाथा श्रवण करने का सौभाग्य सुलभ हुआ है। कथा में श्रद्धालुओं की विशाल संख्या में उपस्थिति हो रही है। आयोजकों ने नगर एवं क्षेत्रीय श्रद्धालु जनों से अधिकाधिक संख्या में उपस्थित रहकर कथामृत पान करने का आग्रह किया है। यह कथा गंगा 27 मार्च तक प्रतिदिन दोपहर 3 से 6 बजे तक प्रवाहित होगी।