पंच परिवर्तन पदयात्रा की अंतिम यात्रा संपन्न
छह माह तक चली 40 किमी की पदयात्रा, 19 को होगा समापन
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बैतूल। गौ ग्राम संस्कृति संरक्षण समिति, रानीपुर के तत्वावधान में आयोजित पंच परिवर्तन पदयात्रा की इस वर्ष की अंतिम यात्रा मंगलवार 17 मार्च को श्रद्धा, उत्साह और भक्ति के माहौल में निकाली गई। यह पदयात्रा पूज्य तपस्वी संत श्री श्री 1008 निक्कुदास जी महाराज की सूक्ष्म उपस्थिति, माता रेणुका की कृपा और संतों के संरक्षण में पिछले छह माह से लगातार संचालित हो रही थी।
समिति के संस्थापक वीरेंद्र बिलगैया ने बताया कि पदयात्रा का शुभारंभ अश्विन शुक्ल अष्टमी 30 सितंबर 2025 को हुआ था और लगभग छह माह बाद चैत्र कृष्ण चतुर्दशी 17 मार्च 2026 को इस वर्ष की अंतिम यात्रा संपन्न हुई। इस दौरान पंकज मुनि महाराज, काले महाराज और गिरि महाराज सहित कई संतों का सान्निध्य मिला। यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, ग्रामीणजन, माताएं-बहनें और युवा शामिल हुए।
लगभग 40 किलोमीटर लंबी यह पदयात्रा बोरी वाले बाबा जी की तपस्थली संत निक्कुदास आश्रम, रानीपुर से शुरू होकर कुही, भोपाली, डंगवा, जामखोदर, बैलोंड और बोरी गांवों से होती हुई माता रानी के छावल धाम तक पहुंचती रही। छह माह तक चली इस यात्रा को श्रद्धालुओं ने भक्ति, साहस, समर्पण और समाज परिवर्तन का संगम बताया।
बैतूल नगर के गंज स्थित प्राचीन मां संतोषी माता मंदिर से प्रत्येक सोमवार को ध्वज यात्रा निकाली जाती थी, जो मंगलवार को रानीपुर आश्रम से निकलने वाली पदयात्रा में शामिल होती थी और पूरे क्षेत्र में सनातन संस्कृति और जनजागरण का संदेश देती थी।
समिति के अनुसार 19 मार्च को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, हिंदू नववर्ष गुड़ी पड़वा के अवसर पर माधव गौशाला, हनुमान जी महाराज की सिद्ध कुटी, रानीपुर में भव्य समापन समारोह आयोजित होगा। इस दौरान धर्मध्वज स्थापना और रामचरितमानस महायज्ञ का शुभारंभ किया जाएगा तथा संतों के आशीर्वचन और धार्मिक आयोजन होंगे।
समिति के प्रतीक राठौर ने बताया कि पंच परिवर्तन पदयात्रा सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, कुटुंब प्रबोधन, स्व आधारित जीवन और नागरिक कर्तव्यबोध जैसे पांच मूल्यों के प्रसार का अभियान है। उन्होंने बताया कि पंजाब, गुजरात, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों से संतों की सहभागिता रही, वहीं बैतूल जिले के करीब 300 गांवों से श्रद्धालु इसमें शामिल हुए। समिति के चले गाय की ओर, चले ग्राम की ओर, चले प्रकृति की ओर के संदेश के साथ हर गांव में धर्मध्वजा स्थापित कर जनजागरण का संकल्प लिया गया। समिति ने बताया कि यह पदयात्रा आगामी वर्ष अश्विन मास से फिर शुरू की जाएगी।

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