अनुपपुर। जिला मुख्यालय की सड़कों पर यातायात नियमों की धज्जियाँ उड़ाते हुए भारी मालवाहक वाहन धड़ल्ले से दौड़ रहे हैं। ताज्जुब की बात यह है कि इन गाड़ियों के पास न तो वैध फिटनेस प्रमाणपत्र है, न परमिट और न ही समय पर भरा गया टैक्स। बावजूद इसके, जिला परिवहन कार्यालय की कुंभकर्णी नींद नहीं टूट रही है।
दस्तावेजों में खुली पोल: एक्सपायरी डेट पर चल रहा कारोबार
प्रस्तुत दस्तावेजों (CG04LQ9913, CG04LQ9914, CG04LQ9915) के अनुसार, ये गाड़ियाँ तकनीकी और कानूनी रूप से सड़क पर चलने के लायक नहीं हैं। बिना फिटनेस के ये भारी वाहन सड़कों पर किसी बड़े हादसे को न्योता दे रहे हैं।
फिटनेस: इन सभी गाड़ियों की फिटनेस दिसंबर 2022 में ही खत्म हो चुकी है।
टैक्स: वाहनों का रोड टैक्स फरवरी 2021 से बकाया है।
नेशनल परमिट: परमिट की वैधता अप्रैल 2020 में ही समाप्त हो चुकी है।
सवाल यह उठता है कि जब ऑनलाइन पोर्टल पर यह "लाल निशान" साफ दिख रहा है, तो विभाग की नजरें इस पर क्यों नहीं पड़ रही हैं?
परिवहन अधिकारी की भूमिका पर सवाल
हैरानी की बात यह है कि जिला परिवहन अधिकारी को इन गाड़ियों की पुख्ता जानकारी दिए जाने के बाद भी अब तक कोई ठोस विभागीय कार्रवाई नहीं की गई है। एक ओर जहाँ यातायात पुलिस कुछ सक्रियता दिखाते हुए गाड़ियों को जब्त कर रही है, वहीं परिवहन विभाग की चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े करती है। क्या इन रसूखदार गाड़ी मालिकों को विभाग का संरक्षण प्राप्त है? बिना टैक्स और बिना फिटनेस के सालों से चल रहे इन ट्रकों से राजस्व के नुकसान का जिम्मेदार कौन है?
राजस्व को चपत और 'सेटअप' का खेल
सूत्रों की मानें तो यह महज लापरवाही का मामला नहीं, बल्कि परिवहन विभाग और वाहन स्वामियों के बीच गहरे 'सांठगांठ' की ओर इशारा करता है। नियमानुसार, जिन वाहनों का टैक्स और परमिट वर्षों से बकाया है, उन पर भारी जुर्माना लगाकर उन्हें तुरंत ब्लैकलिस्ट किया जाना चाहिए था। लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति करना यह दर्शाता है कि विभागीय अमला सरकारी खजाने को चूना लगाकर निजी हितों को साधने में लगा है। सड़कों पर सरेआम नियम टूटने के बावजूद उड़नदस्तों का इन "खास" गाड़ियों को न रोकना विभाग की निष्पक्षता पर कालिख पोत रहा है।
हादसे के बाद कौन लेगा जिम्मेदारी?
बिना बीमा और बिना फिटनेस की ये गाड़ियाँ यदि किसी दुर्घटना का शिकार होती हैं, तो पीड़ित पक्ष को किसी भी प्रकार का कानूनी क्लेम मिलना नामुमकिन होगा। तकनीकी रूप से अनफिट ये ट्रक कभी भी ब्रेक फेल होने या अन्य खराबी के कारण काल का ग्रास बन सकते हैं। ऐसे में क्या परिवहन विभाग किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है?
शिकायतकर्ता ने उच्च अधिकारियों से मांग की है कि इस पूरे सिंडिकेट की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों समेत वाहन मालिकों पर गैर-जमानती धाराओं के तहत मामला दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाए।

Continue With Google
Comments (0)