आर्यमान सिंह रघुवंशी बने सिविल जज — क्षेत्र में हर्ष, युवाओं के लिए प्रेरणा

मुलताई। छोटे से ग्राम घाट पिपरिया से निकलकर न्यायिक सेवा जैसे प्रतिष्ठित क्षेत्र में स्थान बनाना यह सिद्ध करता है कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती। मुलताई तहसील के ग्राम घाट पिपरिया निवासी आर्यमान सिंह रघुवंशी ने छत्तीसगढ़ सिविल जज परीक्षा में अपने प्रथम प्रयास में ही सातवीं रैंक प्राप्त कर चयनित होकर पूरे क्षेत्र, समाज एवं जिले को गौरवान्वित किया है। उनकी इस उपलब्धि से ग्रामीण अंचल में हर्ष का वातावरण है तथा वे सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने वाले युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनकर उभरे हैं।

आर्यमान सिंह रघुवंशी के पिता शिवेंद्र रघुवंशी एवं माता कला शिवेंद्र रघुवंशी दोनों शासकीय शिक्षक हैं। शिक्षा-संस्कारों से परिपूर्ण पारिवारिक वातावरण ने उनके व्यक्तित्व को दिशा दी। आर्यमान ने 12वीं के पश्चात CLAT परीक्षा उत्तीर्ण कर नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, नागपुर से विधि स्नातक (एलएलबी) की उपाधि प्राप्त की तथा आगे इंदौर से एलएलएम कर विधि अध्ययन को और गहराई दी। न्यायिक सेवा में जाने का स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित कर उन्होंने अनुशासित जीवन, कठोर परिश्रम और निरंतर अध्ययन से यह सफलता अर्जित की।

उन्होंने अपने चाचा अधिवक्ता देवेंद्र सिंह रघुवंशी के मार्गदर्शन में सिविल जज परीक्षा की तैयारी की। अपनी सफलता का श्रेय उन्होंने अपने स्वर्गीय दादा यशवंत सिंह चौधरी, गुरुजनों, माता-पिता एवं चाचा को समर्पित करते हुए कहा कि “संस्कार, मार्गदर्शन और सतत परिश्रम ही सफलता की वास्तविक कुंजी हैं।”

आर्यमान के चयन पर पूरे रघुवंशी समाज सहित जिलेभर से बधाइयों का सिलसिला जारी है। ग्राम घाट पिपरिया में उत्सव जैसा वातावरण है। ग्राम पंचायत के सरपंच बेनी सिंह रघुवंशी ने समस्त ग्रामवासियों की ओर से हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि “आर्यमान ने हमारे गाँव का नाम रोशन किया है। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि ग्रामीण पृष्ठभूमि का युवा भी उच्च न्यायिक पद तक पहुँच सकता है। वे समाज के युवाओं के लिए जीवंत प्रेरणा हैं।”

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को संदेश देते हुए आर्यमान ने कहा कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, समय का सदुपयोग किया जाए और निरंतर परिश्रम किया जाए तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती।