मध्यप्रदेश के सीहोर जिले के आष्टा के शासकीय सिविल अस्पताल में सोनोग्राफी मशीन होने के बावजूद मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति न होने के कारण मरीजों को निजी केंद्रों पर 700 से 1100 रुपये तक खर्च कर सोनोग्राफी करानी पड़ रही है।

करोड़ों खर्च लेकिन सुविधा का पता नहीं 

करीब 9 करोड़ रुपये की लागत से कुछ समय पहले अस्पताल का नया भवन बनाया गया था। सोनोग्राफी मशीन भी स्थापित की गई, लेकिन इसे संचालित करने के लिए रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति नहीं हो पाई है।वर्तमान में, प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा योजना के तहत महीने की 9 और 25 तारीख को लगने वाले शिविरों में आने वाली गर्भवती महिलाओं की ही सोनोग्राफी की जाती है। इसके लिए ऑनलाइन पर्ची कटने के बाद उन्हें अनुबंधित सेंटर पर भेजा जाता है। आम दिनों में गर्भवती महिलाओं सहित अन्य मरीजों को यह सुविधा उपलब्ध नहीं है।

सिविल अस्पताल में प्रतिदिन लगभग 450 मरीजों की ओपीडी दर्ज होती है। इनमें से 35 से 40 मरीजों को सोनोग्राफी की आवश्यकता होती है। रेडियोलॉजिस्ट न होने के कारण इन मरीजों के पास निजी अस्पतालों में जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। कई मरीज आर्थिक अभाव के कारण सोनोग्राफी नहीं करा पाते और उन्हें बिना जांच के लौटना पड़ता है। मरीजों ने मांग की है कि अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की भर्ती कर सोनोग्राफी सेवा शुरू की जाए। इस संबंध में, बीएमओ आष्टा डॉ. अमित माथुर ने बताया कि शासन की प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा योजना के तहत ही गर्भवती महिलाओं की सोनोग्राफी अनुबंधित सेंटर पर कराई जाती है, जिसके लिए अस्पताल से ऑनलाइन पर्ची जारी होती है।

 

डॉक्टर की भी है कमी कब पूरी होगी साहब

पिछले कुछ समय से अस्पताल में मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है उस हिसाब से डॉक्टर की भर्ती नहीं हो पाई है। इसकी मांग कई बार अधिकारी, जनप्रतिनिधियों के निरीक्षण करने के दौरान भी उठी लेकिन अब तक पूरी नहीं हो पाई है। स्थानीय नागरिको ने बताया कि लाखों, करोड़ों रुपए अस्पताल के नाम पर खर्च करने के बावजूद सुविधा में इजाफा नहीं होना सिस्टम की हकीकत बताता है। नतीजा हालात में कोई सुधार नहीं हो रहा है।