मध्यप्रदेश मंडला: आदिवासी बैगा परिवारों के वनाधिकार का अधूरा सपना

मंडला जिले की ग्राम पंचायत किसली भीलवानी में पंद्रह वर्षों से वनाधिकार पट्टा की मांग अधूरी है। ग्रामीण सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटते-काटते थक चुके हैं, लेकिन उनके अधिकार अब भी फाइलों में कैद हैं।

वन विभाग और राजस्व विभाग के बीच जिम्मेदारी टालने का खेल ग्रामीणों के लिए एक लंबी लड़ाई का कारण बन गया है। इस प्रक्रिया में ग्रामीण कई सरकारी योजनाओं से वंचित रह गए हैं।

  • खेत हैं, मेहनत है, पर सरकारी कागजों में अधिकार नहीं
  • खाद, बीज और बैंक ऋण की सुविधाओं से वंचित
  • कान्हा टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक को सौंपा आवेदन

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर उन्हें जल्द ही उनका अधिकार नहीं मिला, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे।

इस संबंध में सहायक संचालक पी. के. वर्मा ने कहा कि वनग्राम से जुड़े मामलों में अधिकार पत्र जारी नहीं हो पाए हैं, जिससे ग्रामीण सुविधाओं से वंचित हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मुद्दे पर गंभीरता से कदम उठाया जाएगा और कलेक्टर से चर्चा की जाएगी।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी वही है: क्या पंद्रह साल से अपने अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे इन ग्रामीणों को उनका हक मिलेगा, या फिर सरकारी फाइलों में दबे ये दावे यूं ही दम तोड़ते रहेंगे?

बाईट:

  • खुजल सिंह, जनपद सदस्य
  • ग्रामीण, ग्राम किसली भिलवानी
  • प्रकाश कुमार वर्मा, उपसंचालक कान्हा टाइगर रिजर्व कोर जोन