रंग दे बसंती चोला: शहीद दिवस पर देशभक्ति का अद्भुत उत्सव

भोपाल। 23 मार्च का दिन मध्‍य प्रदेश प्रेस क्लब द्वारा आयोजित "रंग दे बसंती चोला" कार्यक्रम के माध्यम से अमर शहीदों की शहादत और राष्ट्रप्रेम के अद्भुत उत्‍सव में परिवर्तित हो गया। शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को समर्पित इस आयोजन ने हज़ारों दिलों में देशभक्ति की लौ जलाई। यह कार्यक्रम शाम 5:30 बजे से रात 10:00 बजे तक भावनाओं की ऊंचाइयों को छूता रहा।

कार्यक्रम में गीत-संगीत की सुरमयी प्रस्तुतियों ने ऐसा वातावरण बनाया कि उपस्थित जनसमूह मंत्रमुग्ध होकर राष्ट्रप्रेम में डूब गया। बड़ी संख्या में युवाओं ने इस आयोजन में हिस्सा लिया, जिनमें सीआरपीएफ, जीआरपी, रैपिड एक्शन फोर्स के जवान, एनसीसी कैडेट्स, सामाजिक कार्यकर्ता, पत्रकार, बुद्धिजीवी, और आरकेडीएफ यूनिवर्सिटी के विद्यार्थी शामिल थे।

मुख्य अतिथि के रूप में आरकेडीएफ यूनिवर्सिटी के कुलगुरु डॉ. विजय कुमार अग्रवाल ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई, जबकि अध्यक्षता मध्य प्रदेश प्रेस क्लब के अध्यक्ष डॉ. नवीन आनंद जोशी ने की। विशेष अतिथियों में असिस्टेंट कमांडेंट श्री जी.पी. सिंह, गैलेंट्री अवॉर्ड विजेता धीरेंद्र सिंह और नरेंद्र कुमार, डॉ. रत्नेश जैन, डॉ. सुनील पाटिल, डॉ. गगन शर्मा, और डॉ. बलजीत शर्मा शामिल थे।

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. नवीन आनंद जोशी ने कहा, "आजादी का मूल्य उन शहीदों के त्याग और बलिदान से निर्धारित होता है, जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति दी।" उन्होंने प्रेस क्लब की ओर से ऐसे आयोजनों को भविष्य में निरंतर जारी रखने का आश्वासन दिया।

मुख्य अतिथि डॉ. विजय कुमार अग्रवाल ने कहा, "हमें गर्व है कि हमारा जन्म भारतभूमि पर हुआ है।" उन्होंने प्रेस क्लब के इस प्रयास की सराहना की और भविष्य में सहयोग का आश्वासन दिया।

कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण आईटीबीपी के बैंड द्वारा देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति रही, जिसके लिए आईटीबीपी के आईजी श्री अजय पाल सिंह का विशेष योगदान रहा। भोपाल की 55 वर्षीय एवरेस्ट पर्वतारोही श्रीमती ज्योति रात्रे की कहानी ने सभी लोगों को प्रेरित किया।

इस अवसर पर शहीद परिवारों को सम्मानित किया गया और विभिन्न सुरक्षा बलों के जवानों को उनके विशिष्ट योगदान के लिए स्मृति चिन्ह भेंट किए गए।

कार्यक्रम का सफल संचालन मध्य प्रदेश प्रेस क्लब के संयुक्त सचिव अजय प्रताप सिंह ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन महेंद्र शर्मा ने किया।

विशेष आकर्षण के रूप में सैनिकों द्वारा होली के रंगों से सराबोर प्रस्तुतियाँ दी गईं, जहां फूलों की होली का आयोजन हुआ। यह आयोजन केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह राष्ट्रप्रेम, बलिदान, और एकता की भावना का जीवंत प्रतीक बनकर उपस्थित जनसमूह के हृदय में अमिट छाप छोड़ गया।