सागर में होली का उल्लास: धुरेड़ी के जश्न के साथ रंगों की बौछार

सागर जिले के केसली में होली का त्योहार पूरे जोश और उमंग के साथ मनाया जा रहा है। होलिका दहन के साथ मंगलवार से ही उत्सव की शुरुआत हो गई है, जो धुरेड़ी के मुख्य उत्सव के साथ बुधवार को अपने चरम पर पहुंचा।

खास तिथियां और ज्योतिषीय गणना

ज्योतिषीय गणना और चंद्रग्रहण के प्रभाव के चलते इस वर्ष धुरेड़ी का मुख्य पर्व 4 मार्च, बुधवार को मनाया जा रहा है। हालांकि, 3 मार्च से ही फाग और गुलाल की धूम शुरू हो गई थी। होली के दो दिन मनाए जाने के कारण मंगलवार को यात्री बसों का संचालन किया गया। बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन के अनुसार, बुधवार को बसें बंद रहेंगी और गुरुवार, 5 मार्च को दोज पूजा के बाद दोबारा शुरू होंगी।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

हुड़दंग और हादसों पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस प्रशासन ने कड़े प्रबंध किए हैं। मंगलवार और बुधवार को दिन-रात गश्ती दलों के साथ थाना पुलिस बल तैनात रहेगा। नशे में वाहन चलाने वालों पर चालान काटा जाएगा और जबरन रंग लगाकर विवाद करने वालों की तत्काल गिरफ्तारी होगी।

धार्मिक आस्था और आयोजन

होलिका दहन के अगले दिन मंगलवार को चंद्रग्रहण के कारण जिले के मंदिरों में मंगला आरती के बाद पट बंद कर दिए गए थे। विद्वत संघ के अनुसार, 3 मार्च को सुबह 9:31 बजे से सूतक काल शुरू होगा, जिसके चलते शुभ कार्य और रंग खेलना वर्जित रहेगा। ग्रहण मोक्ष के बाद ही मंदिरों में सफाई, स्नान और आरती की जाएगी।

  • 3 और 4 मार्च को होली का विशेष आयोजन किया जा सकता है, जिसमें 4 मार्च को प्रतिपदा के कारण विशेष शुभ माना गया है।
  • 5 मार्च को भाई दूज का पर्व मनाया जाएगा।
  • 8 मार्च को रंगपंचमी का आयोजन होगा।

इस वर्ष की होली विशेष ज्योतिषीय कारणों और सुरक्षा उपायों के साथ एक यादगार आयोजन बन रही है। सभी से अपील है कि वे सुरक्षित और शांतिपूर्ण तरीके से त्योहार का आनंद लें।