सिंगरौली
जिले की सड़कों पर बेलगाम अराजकता यातायात व्यवस्था ध्वस्त, हादसे बन रहे आम जिम्मेदारी तय कब?
यह कोई एक दुर्घटना भर नहीं, बल्कि सिंगरौली की बदहाल यातायात व्यवस्था की सच्चाई को उजागर करने वाला कड़वा सच है शहर में लगातार बढ़ती अव्यवस्था और लचर ट्रैफिक प्रबंधन ने आम नागरिकों की सुरक्षा को गंभीर खतरे में डाल दिया है।यातायात प्रभारी दीपेंद्र सिंह कुशवाहा की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि ट्रैफिक नियंत्रण के नाम पर सिर्फ औपचारिकताएं निभाई जा रही हैं, जबकि जमीनी स्तर पर हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है और जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे हुए हैं।शहर के प्रमुख चौराहों पर रोजाना जाम की स्थिति बनी रहती है। नो-एंट्री में वाहनों की आवाजाही, अवैध पार्किंग और ओवरलोडिंग जैसे गंभीर उल्लंघन धड़ल्ले से जारी हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ दिखावा नजर आता है। नतीजतन, आम जनता हर दिन जोखिम भरे सफर के लिए मजबूर है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब से दोबारा जिम्मेदारी सौंपी गई है, तब से यातायात व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर गई है। हालिया दुर्घटना को लोग इसी लापरवाही का प्रत्यक्ष उदाहरण बता रहे हैं।वहीं व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कुछ लोग यह भी आरोप लगा रहे हैं कि कार्रवाई की जगह सिर्फ प्रभावशाली लोगों को फायदा पहुंचाया जा रहा है, जिससे भ्रष्टाचार और पक्षपात की आशंकाएं गहराती जा रही हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या जिम्मेदारों पर ठोस कार्रवाई होगी या फिर सिंगरौली की सड़कों पर यूं ही हादसे होते रहेंगे? आम जनता सुरक्षित यातायात व्यवस्था की उम्मीद लगाए बैठी है, लेकिन हालात में सुधार कब आएगा, यह अभी भी अनिश्चित है।

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