मुंगावली में अतिक्रमण हटाओ अभियान पर भेदभाव के आरोप, मजदूर संघ ने उठाए सवाल

मुंगावली के नगर परिषद द्वारा शहर के मुख्य मार्गों को व्यवस्थित करने के लिए चलाए जा रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान पर भेदभाव की शिकायतें बढ़ने लगी हैं। कृषि एवं ग्रामीण मजदूर संघ (भारतीय मजदूर संघ से संबद्ध) ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि यह अभियान गरीबों की आजीविका पर संकट पैदा कर रहा है जबकि प्रभावशाली लोगों को संरक्षण मिल रहा है।

संघ के जिला अध्यक्ष भगवान सिंह कटारिया ने अनुविभागीय अधिकारी इसरार खान को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि प्रशासन की कार्रवाई में समानता के सिद्धांत का उल्लंघन हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर परिषद का अमला केवल निर्धन मजदूरों और गरीब सब्जी विक्रेताओं को निशाना बना रहा है, जबकि शहर के प्रभावशाली व्यक्तियों और बड़े व्यापारियों द्वारा किए गए स्थाई अतिक्रमणों पर प्रशासन मौन है।

  • अभियान में भेदभावपूर्ण कार्रवाई का आरोप
  • गरीबों की दुकानों और ठेलों पर बुलडोजर चलाने का आरोप
  • प्रभावशाली व्यक्तियों के अतिक्रमण पर कार्रवाई नहीं

मजदूर संघ ने प्रशासन से मांग की है कि यदि अतिक्रमण हटाना है, तो बिना भेदभाव के सभी श्रेणियों पर समान रूप से कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही गरीब विक्रेताओं के पुनर्वास और उनके व्यापार के लिए 'वेंडिंग जोन' सुनिश्चित करने की भी मांग की गई है, ताकि उनकी दैनिक आजीविका प्रभावित न हो।

संघ की अपील: "हम अतिक्रमण हटाने के कार्य का सम्मान करते हैं। लेकिन कार्रवाई निष्पक्ष होनी चाहिए। केवल गरीबों को उजाड़ना और रसूखदारों को छोड़ देना न्यायसंगत नहीं है।"

इस मामले की शिकायत अनुविभागीय अधिकारी सहित नगरपालिका अधिकारी और थाना प्रभारी मुंगावली को भी की गई है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस शिकायत के बाद अपनी कार्यशैली में क्या बदलाव लाता है।